ट्रम्प ने की ‘आतं’की संगठन’ की तारीफ़ तो एरदोआन ने सामने ही कह दी बड़ी बात..

पिछले कुछ समय में तुर्की और अमरीका के संबंधों में बिगाड़ आ गया. हालाँकि उसके बाद कुछ ऐसी चीज़ें भी हुईं कि सम्बन्ध बेहतर होने लगे. असल में अमरीका को तुर्की का ‘ऑपरेशन पीस स्प्रिंग’ पसंद नहीं आया. तुर्की ने ये ऑपरेशन पीकेके/वाईपीजी के ख़िलाफ़ किया था. सीरिया के उत्तरी क्षेत्र में तुर्की सेफ़ ज़ोन बनाने की मांग लम्बे समय से कर रहा था और वो चाहता था कि इस ज़ोन में पीकेके/वाईपीजी न रहें. तुर्की इन संस्थाओं को आतंकी संस्था मानता है.

इसमें दिलचस्प ये है कि अमरीका इन संस्थाओं से सहयोग ले चुका है. दाएश के ख़िलाफ़ जंग में अमरीका को इन कुर्द संस्थाओं का सहयोग मिला. यही वजह थी कि वो नहीं चाहता था कि तुर्की कोई भी सैन्य कार्यवाई इनके ख़िलाफ़ करे. तुर्की ने कार्यवाई की, उसके बाद अमरीका ने तुर्की पर कुछ प्रतिबन्ध लगाये लेकिन बाद में तुर्की और अमरीका के बीच ‘संघर्ष-विराम’ समझौता हुआ. इसके बाद से ही तुर्की और अमरीका के सम्बन्ध फिर सुधरने लगे हैं.

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोआन ने हाल ही में अमरीका की यात्रा की है.उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिलकर कई मुद्दों पर चर्चा की. इस यात्रा के दौरान जब प्रेस वार्ता में दोनों नेता प्रेस को संबोधित कर रहे थे तो ट्रम्प ने एरदोआन की तारीफ़ की. उन्होंने कहा कि कुर्द लोगों के लिए तुर्की ने बहुत से काम किए हैं. कुर्द लोगों के लिए किए गए राष्ट्रपति एरदोआन के काम की सराहना करते हुए उन्होंने तुर्की की तारीफ़ की.

साथ ही उन्होंने पीकेके/वाईपीजी के सहयोग को भी याद किया. एरदोआन ने अपने बयान में कहा कि वो कुर्दों के समर्थक हैं और तुर्की हमेशा कुर्दों के लिए काम करता रहेगा. उन्होंने कहा कि तुर्की की लड़ाई कुछ आ’तंकी संगठन से है.एरदोआन ने अपने बयान से साफ़ कर दिया है कि तुर्की ने क्लियर स्टैंड लिया हुआ है.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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