एर्दोगान ने पुतिन को किया वार्न, अज़रबैजान और अर्मीनिया को लेकर कही ये बात..

October 15, 2020 by No Comments

राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोगन ने नागोर्नो-काराबाख़ के मुद्दे पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की. उन्होंने कहा कि तुर्की चाहता है कि नागोर्नो-काराबाख़ का परमानेंट सलूशन निकाला जाए. तुर्की राष्ट्रपति दफ़्तर ने एक बयान जारी कर कहा कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय वि’वाद पर बात की जिसमें अज़रबैजानी-आर्मीनियाई वि’वाद अहम् तरह से डिस्कस किया गया.

एरदोगन ने पुतिन को चेताया कि आर्मीनिया इस कोशिश में है कि नागोर्नो काराबाख़ में अपने अवै’ध क़ब्ज़े को परमानेंट बना ले. उन्होंने कहा कि तुर्की चाहता है कि इसका एक ऐसा हल निकले जो चल पाए. दूसरी ओर क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति आवास) ने बयान जारी कर कहा कि उसे चिंता है कि नागोर्नो-काराबाख़ में पश्चिम एशिया से फाइटर जा रहे हैं. दोनों ही नेताओं ने इस बात को अहम् माना कि जो रूस के नेतृत्व में सीज़फायर हुआ उसे माना जाना चाहिए.

नाग्रोनो काराबाख़ को लेकर विवा’द 30 साल पुराना है. 27 सितम्बर को एक बार फिर दोनों देश युद्ध के रास्ते पर चले गए. वि’वाद नागोर्नो-काराबाख़ को लेकर है जिस पर क़रीब 30 साल से आर्मीनिया का क़’ब्ज़ा है. ये क्षेत्र अन्तराष्ट्रीय तौर पर अज़रबैजान का माना जाता है. अज़रबैजान बार-बार कहता रहा है कि उसे ये क्षेत्र वापिस दिया जाए. यूनाइटेड नेशंस और अन्तराष्ट्रीय क़ा’नून भी ये मानता है. अज़रबैजान ने मौजूदा जं’ग में अपनी बढ़त बनाई हुई है और 20 से अधिक गाँव से आर्मीनियाई क़’ब्ज़ा हटा लिया है.

उल्लेखनीय है कि सोवियत युनियन के कमज़ोर होने की शुरुआत के साथ ही ये विवा’द भी खड़ा हुआ था. नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र अज़रबैजान का हिस्सा है लेकिन इस पर आर्मीनिया ने पिछले क़रीब 30 साल से क़’ब्ज़ा जमाया हुआ है. अर्मीनिया कहता है कि यहाँ उसके मूल के अधिक लोग रहते हैं इसलिए ये उसे दिया जाए लेकिन अन्तराष्ट्रीय कम्युनिटी इसे अज़रबैजान का हिस्सा मानती है.

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