दो बड़ी पार्टियों के समझौते के बाद भी इज़राइल में राजनीतिक ह’लचल, इस वजह से बनी हुई है..

तेल-अवीव: इज़राइल में पैदा हुआ राजनीतिक सं’कट कुछ दिनों के लिए टलता तो नज़र आ रहा है लेकिन ऐसा नहीं लगता कि ये हल ज़्यादा देर तक चलेगा. इज़राइल में पिछले एक साल में तीन चुनाव हो चुके हैं लेकिन किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है. हालत ये है कि दो परस्पर विरोधी दल लिकुद और ब्लू एंड वाइट पार्टी अब साथ आकर सरकार बना रही हैं.

मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की दक्षिणपंथी पार्टी लिकुद और बैनी गैन्त्ज़ की कम दक्षिणपंथी पार्टी ब्लू एंड वाइट में समझौता हुआ है जिसके तहत 18 महीने बेंजामिन नेतान्याहू प्रधानमंत्री रहेंगे और उसके अगले 18 महीने ब्लू एंड वाइट पार्टी की सत्ता होगी. नेतन्याहू ने ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के नेता बेन्नी गैन्त्ज़ को सरकार में शामिल होने का न्योता दिया था और कोरोना वायरस महामारी के बीच कोई और राजनीतिक रस्ता न सूझता देख गैन्त्ज़ ने इस प्रस्ताव को मान लिया.

अब इस मुद्दे पर सहमति बनी ही थी कि कई लोग इस गठबंधन का विरोध करने लगे. नेतान्याहू का विरोध देश में बड़े स्तर पर है. इसका कारण है उन पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले. इन पर अगले महीने से क़ानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि नेतान्याहू ख़ुद ही जज और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति पर फ़ैसला करेंगे, ऐसे में ये कैसे संभव है कि क़ानूनी प्रक्रिया निष्पक्ष होगी. बहुत से गैन्त्ज़ समर्थकों को ये आशंका है कि नेतान्याहू 18 महीने पूरे होने पर ख़ुद ही गठबंधन तोड़ देंगे और नए चुनाव करा लेंगे. ख़बर है कि ब्लू एंड वाइट पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी इस गठबंधन से ख़ुश नहीं हैं.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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