देवेन्द्र फडनवीस दे सकते हैं इस्तीफ़ा, पवार और अठावले ने की मुलाक़ात

भारत राजनीति

मुंबई: महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट शायद अब अपने क्लाइमेक्स की तरफ़ बढ़ रहा है. विधायकों की जोड़ तोड़ का खेल शुरू हो गया है. भाजपा और शिवसेना गठबंधन अब लगभग ख़त्म होने की कगार पर है. हालाँकि अभी भी भाजपा की ओर से कोशिश की जा रही है कि शिवसेना मान जाए पर शिवसेना ने साफ़ कह दिया है कि जब तक उसकी बात नहीं मानी जायेगी वो नहीं मानेगी. इस बीच शिवसेना ने अपने विधायकों को होटल में ठहराया है.

कांग्रेस के बारे में भी ख़बर है कि वो अपने विधायकों को जयपुर भेज सकती है. शिवसेना और भाजपा का आरोप है कि वो उनकी पार्टियों के विधायकों को ख़रीदने की कोशिश कर रही है. राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना भी बढ़ गई है. भाजपा और शिवसेना में सहमति न हो पाने की वजह से राष्ट्रपति शासन ही विकल्प बचेगा. शिवसेना अगर भाजपा से गठबंधन तोड़ देती है तभी एनसीपी-कांग्रेस से वो गठबंधन को लेकर बात कर सकती है.

इस बीच ऐसी ख़बरें भी मीडिया में आ रही हैं कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस अपना इस्तीफ़ा किसी भी वक़्त दे सकते हैं. महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 10 नवम्बर तक ही है और इस वजह से 9 नवम्बर तक सरकार का गठन होना ज़रूरी है. इस पूरे सियासी ड्रामे में शिवसेना और भाजपा की अच्छी ख़ासी किरकिरी हुई है. वहीँ एनसीपी और कांग्रेस ने जिस समझदारी से बयान दिए हैं इससे इन दोनों दलों की छवि बेहतर हुई है.

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने आज राम दास अठावले से मुलाक़ात की.उन्होंने इसके बाद अपने बयान में कहा,” शिवसेना और भाजपा को जनता ने मैंडेट दिया है और उन्हें सरकार बनानी चाहिए.” उन्होंने कहा कि यही बात रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष रामदास अठावले ने कही है और हम इस मुद्दे पर एक राय रखते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार बनने में देरी की वजह से राज्य को आर्थिक नुक़सान हो रहा है.

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