कोरोना वायरस के नाम पर तबलीग़ जमात के लोगों को बनाया गया ‘बलि का बक़रा’, हाई कोर्ट ने आदेश के साथ मीडिया को भी..

August 22, 2020 by No Comments

मुंबई/औरंगाबाद: बोम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने आज एक ऐसा फ़ैसला सुनाया है जिसके बाद अदालत की तारीफ़ हो रही है और कई नेता कह रहे हैं कि इस फ़ैसले ने अदालत में विश्वास मज़बूत कर दिया है. असल में मामला निज़ामुद्दीन मरकज़ में तबलीग़ जमात के लोगों को कोरोना वायरस फैलाने का इलज़ाम लगाये जाने का था. अदालत ने तबलीग जमात के सदस्यों के ख़िलाफ़ FIR को ख़ारिज कर दिया.

अदालत ने कहा कि इस मामले में तबलीग़ जमात के सदस्यों को ‘ब’लि का बक़रा’ बनाया गया है. अदालत ने मेन स्ट्रीम मीडिया को भी जम कर फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि इस तरह का प्रोपेगेंडा चलाया गया कि तबलीग़ जमात के लोग ही कोरोना फैला रहे हैं.अदालत के इस फ़ैसले के बाद आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असद उद्दीन ओवैसी ने भाजपा पर जमकर हमला बोला.

ओवैसी ने कहा कि प्रोपेगेंडा की वजह से मुस्लिम समाज के लोगों को न’फ़रत और हिं’सा का शि’कार होना पड़ा. ओवैसी ने ट्वीट कर कहा,”पूरी ज़िम्मेदारी से बीजेपी को बचाने के लिए मीडिया ने तबलीगी जमात को ब’लि का बकरा बनाया। इस पूरे प्रॉपेगेंडा से देशभर में मुस्लिमों को नफ’रत और हिं’सा का शि’कार होना पड़ा।”

अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा,”दिल्ली के मरकज़ में आए विदेशी लोगों के ख़िलाफ़ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़ा प्रॉपेगेंडा चलाया गया। ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिसमें भारत में फैले COVID-19 संक्रमण का ज़िम्मेदार इन विदेशी लोगों को ही बनाने की कोशिश की गई। तबलीग़ जमात को ‘ब’लि का बकरा’ बनाया गया।”

एक न्यूज़ वेबसाइट में छपी ख़बर के मुताबिक़, हाई कोर्ट बेंच ने कहा,”भारत में संक्रमण के ताज़ा आंकड़े दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ़ ऐसे एक्शन नहीं लिए जाने चाहिए थे। विदेशियों के ख़िलाफ़ जो एक्शन लिया गया, उस पर पश्चाचाताप करने और क्षतिपूर्ति के लिए पॉज़िटिव कदम उठाए जाने की जरूरत है।

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