सीरम इंस्टिट्यूट को मिली को-वैक्सीन की मंज़ूरी, तीसरे फेज़ के ट्रायल..

January 3, 2021 by No Comments

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड की वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ को इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल गई है. यह मंजूरी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी ने दी है. यह मंज़ूरी कुछ शर्तों के आधार पर मिली है, कंपनियों की वैक्सीन के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल को इजाज़त दी गई है. कमेटी ने 1 और 2 जनवरी को काफी विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया है.

पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ने क्लिनिकल ट्रायल और ‘कोविशिल्ड’ की मैनुफैक्चरिंग के लिए ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ पार्टनरशिप की है, जबकि भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर ‘कोवैक्सीन’ बनाई है. अमेरिका की फाइजर पहली वैक्सीन थी, जिसने 4 दिसंबर को तुरंत मंजूरी के लिए अप्लाई किया था. इसके बाद क्रमश: 6 और 7 दिसंबर को सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक ने अप्लाई किया था. फाइजर ने हालांकि अभी डेटा पेश करने के लिए और समय मांगा है.

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के विशेषज्ञों की समिति ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कोविड-19 टीके के आपात इस्तेमाल की परमिशन देने के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिक्वेस्ट और ‘कोवैक्सीन’ के इमरजेंसी में इस्तेमाल को परमिशन देने के भारत बायोटेक के अनुरोध पर विचार करने के लिए बुधवार को मीटिंग की थी.

वहीं वैक्सीन को लेकर कुछ आशंकाएँ भी अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा जताई गई हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा कि हमें वैज्ञानिकों की दक्षता पर पूरा भरोसा है पर भाजपा की ताली-थाली वाली अवैज्ञानिक सोच व भाजपा सरकार की वैक्सीन लगवाने की उस चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है, जो कोरोनाकाल में ठप्प-सी पड़ी रही है. हम भाजपा की राजनीतिक वैक्सीन नहीं लगवाएंगे. सपा की सरकार वैक्सीन मुफ़्त लगवाएगी. उनकी पार्टी के एमएलसी ने कहा कि कोरोना वैक्सीन के जरिए लोगों को नपुसंक बनाने की कोशिश की जा रही है. वहीं अखिलेश यादव के इस इस बयान पर वह ट्रोल हो गए.ट्रोलर्स ने कहा कि अच्छा हुआ पल्स पोलियो के पहले उनका यह बयान नहीं आया.

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