कोरोना को लेकर जर्मनी में हुई नई रिसर्च, इंसान के दिमाग़ पर जाकर ये..

February 15, 2021 by No Comments

बर्लिन: कोरोना वायरस की शुरुआत चीन हुई लेकिन यह वायरस दुनिया के अन्य देशों तक फैल गया है. जब यह वायरस आया था तब ये डॉक्टर्स के लिए बिल्कुल नया था क्योंकि यह वायरस भी अपने आप मे बड़ा अलग था। कोविड-19 को लेकर कई शोध शुरू हुए जिससे कि लोगों की जान बचाई जा सके औऱ इस संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।

कोरोना के शुरुआती दौर से अभी तक इस पर शोध चल रहे हैं जिनमे अलग-अलग तरह के परिणाम सामने आ रहे हैं। कोरोना की वैक्सीन भी भारत सहित कुछ अन्य देशों ने बना ली है। UK का नया कोरोना स्ट्रेन अब भी परेशानी का कारण बना है। अब कोरोना वायरस को लेकर हुए एक अध्ययन में एक नई बात सामने आयी है. कोरोना वायरस सिर्फ श्वसन तंत्र को ही नहीं प्रभावित करता है बल्कि केंद्रीय तंत्रिका पर भी दुष्प्रभाव डालता है।

इस अध्ययन में पाया गया है कि कैसे वायरस संक्रमित की नाक से दिमाग में प्रवेश कर सकता है। इससे यह पता लगाना संभव हो सकेगा कि कोविड-19 बीमारी के दौरान मरीजों में न्यूरोलॉजिकल लक्षण क्यों उभर रहे हैं और उसका कैसे इलाज किया जा सकता है। इससे अलग-अलग न्यूरोलाजिकल लक्षण जैसे- स्वाद पहचानने की शाक्ति में कमी आना, सिरदर्द, थकान और चक्कर आदि दिखने लगता है।

जर्मनी की यूनिवर्सिटी का यह अध्ययन नेचर न्यूरोसाइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में 71 वर्ष औसत आयु की 11 महिलाएं व 22 पुरुष शामिल थे।अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि संक्रमितों के मस्तिष्क व श्वसन नली में सार्स-सीओवी-2 आरएनए (वायरस का जेनेटिक मेटेरियल) व प्रोटीन के तत्व मिले हैं। इस तरह के मामले देश में भी देखने में आ रहे हैं।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने चौंकाने वाला बयान दिया है। काउंसिल ने कहा है कि यदि हम कुछ लोगों (क्रिटिकल मास) को वैक्सीन लगाकर कोरोना ट्रांसमिशन रोकने में कामयाब रहे तो शायद पूरी आबादी को वैक्सीन की जरूरत ही न पड़े।

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