कोरोना से ल’ड़ाई में वैज्ञानिकों को मिली बड़ी कामयाबी, वैक्सीन को लेकर अब..

June 16, 2020 by No Comments

लन्दन: यूके के वैज्ञानिकों की टीम ने उम्मीद जताई है कि इस हफ्ते से इंसानों पर कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल जाएगी। इस वैक्सीन को बनाने में नई टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया का सकता है, जिसका मतलब है कि यह अधिक मात्रा में शेल्फ से खरीदे गए उपकरण से बनाया जा सकता है, और 3 डॉलर प्रति डोज का उत्पादन काफी सस्ता होगा। यूके की सरकार ने वैक्सीन बनाने और उसका परीक्षण करने के लिए 18.5 मिलियन डॉलर की सहायता की है और वहीं निजी स्त्रोतों द्वारा पांच मिलियन डॉलर का योगदान दिया गया है।

लंदन के इंपीरियल कालेज के वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस नई वैक्सीन के काम करने के लिए शरीर में एक हजारवां आनुवंशिक पदार्थ यानी आरएनए का एक हजारवां अंश इंजेक्ट कर उसे बढ़ने दिए जाता है। आरएनए के इंजेक्ट होने के बाद शरीर के सेल्स कोरोना की कोशिकाओं में अधिक मात्रा में प्रोटीन का उत्पादन करते हैं और इम्यून सिस्टम को इस वायरस से लड़ने के लिए मजबूत बनाते हैं।

टीम के हेड और इंपीरियल कॉलेज के म्यूकोसियल इंफेक्शन के विशेषज्ञ प्रोफेसर रॉबिन शटॉक ने कहा कि एक लीटर वैक्सीन 200 मिलियन लोगों के लिए पर्याप्त होगा। The Times न्यूजपेपर से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि “यह काफी छोटी खुराक है लेकिन अगर इसको सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो यह बहुत अच्छा है, इसके साथ ही बड़ी मात्रा में इसका उत्पादन करना भी आसान हो जाएगा।”

बता दें कि इस वैक्सीन का चूहे पर परीक्षण करने पर सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हालांकि टीम ने यह भी चेतावनी दी है कि इस वैक्सीन की पहली खुराक के प्रभाव को अपर्याप्त साबित करने के लिए कम से कम एक बूस्टर की जरूरत होगी। इंपीरियल टीम अनुमान लगा रही है कि इंसानों पर परीक्षण करने के लिए 48 घंटों के अंदर ही अनुमति मिल जाएगी। पहले चरण में केवल 120 लोगों को शामिल किया जाएगा, उसके बाद 6000 लोगों के परीक्षण की शुरूआत प्रारंभिक खोजों के आधार पर होगी।

Coronavirus


शटॉक ने कहा कि “इस वैक्सीन के पांच मिलियन डोज तैयार करने के लिए सरकार ने पैसा दिया है, जो 25 लाख लोगों के लिए पर्याप्त है।” आगे उन्होंने कहा कि “यूके के बाकी लोगों के लिए भी वैक्सीन बनाने के लिए हमारे पास क्षमता होनी चाहिए।” यदि यह वैक्सीन इंसानी परीक्षण को पास करती है तो सोशल एंटरप्राइज़ कंपनी VacEquity Global Health द्वारा दुनियाभर में वितरित कर दी जाएगी।

वहीं ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की एक टीम द्वारा भी वैक्सीन बनाई जा रही है, जो इंपीरियल वैक्सीन के सिध्दांतों पर आधारित है, लेकिन एक सौम्य वायरस का इस्तेमाल होस्ट के रूप में करना, जो कि पहले से ही हानिरहित होस्ट वायरस से प्रतिरक्षा करने के कारण कोरोना से प्रतिरक्षा का खतरा पैदा कर सकता है। ऑक्सफोर्ड ने पहले ही इंसानों पर इस वैक्सीन का परीक्षण करना शुरू कर दिया है और अगर इसमें सफलता प्राप्त हुई तो इसे यूरोप में फार्मास्यूटिकल AstraZeneca द्वारा वितरित किया जाएगा, जिसने 2020 के अंत से पहले ही इसका ऐप्रोवाल मिलने की उम्मीद में बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *