मुम्बई: दुनिया में नावेल को’रोना वा’यरस ने एक नए तरह की परेशा’नी खड़ी कर दी है. एक तो ये एक बड़ी समस्या है ही, इस से लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी तरह प्रभावित ज़रूर है. वहीं इससे कई तरह के ऐसे संक’ट भी पैदा हो गए हैं जिनके बारे में हमने पहले कभी सोचा भी नहीं था. हमारे देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्य है महाराष्ट्र. महाराष्ट्र सरकार कोरो’ना को रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है लेकिन इसके साथ ही एक संवैधानिक सं’कट भी खड़ा हो सकता है.

ऐसा माना जा रहा है कि जो लॉक डाउन इस समय पूरे देश में चल रहा है उसकी अवधि बढ़ सकती है. ऐसी परिस्थिति में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए एक अलग तरह की मुश्कि’ल आ सकती है. असल में उद्धव विधान सभा या विधान परिषद् किसी के भी सदस्य नहीं हैं, ऐसे में अगर उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बने रहना है तो उन्हें किसी न किसी सदन में मुख्यमंत्री बनने के 6 माह के भीतर सदस्य बनना ही होगा.

परन्तु जो हालात हैं उसमें कोई चुनाव होना तो बहुत मु’श्किल दिख रहा है. ठाकरे को 28 मई से पहले किसी न किसी सदन का सदस्य होना ज़रूरी है. इस बारे में क़ानून साफ़ पक्ष रखता है. बीते साल नवम्बर में मुख्यमंत्री पद संभालने वाले ठाकरे के लिए यहाँ एक अ’जीब सी मुश्कि’ल खड़ी होती दिख रही है. संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार ठाकरे को छह महीने के अंदर राज्य के किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है. ऐसे में उन्हें 28 मई से पहले किसी भी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है.

इसमें एक बात ध्यान देने की ये है कि 24 अप्रैल को 9 विधानपरिषद की सीटें ख़ाली होंगी और हर दो साल में होने वाले इस चुनाव को लेकर ये तय था कि उद्धव एमएलसी चुन लिए जाएँगे. परन्तु कोरो’ना महा’मारी ने जो समस्या पैदा की है उसके बाद चुनाव आयोग ने सभी चुनाव मुल्तवी कर दिए हैं. अब इसमें जो विकल्प नज़र आता है वो ये है कि राज्यपाल के कोटे की दो सीटें ख़ाली हैं, वो उन्हें अपने कोटे से एमएलसी बना सकते हैं. महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल कोटे से राज्य विधान परिषद के सदस्य के रूप में ठाकरे के नामांकन की सिफारिश करने का फ़ैसला किया.

अब अगर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी मंत्रिमंडल की सिफ़ारिश को मान लेते हैं तो ठाकरे की कुर्सी पर कोई ख़तरा नहीं है.उनके पास एक विकल्प ये भी है कि वो एक बार इस्ती’फ़ा देकर दुबारा शपथ ले लें इससे उन्हें 6 महीने का और समय मिल जाएगा. अब इसमें समस्या ये है कि अगर मुख्यमंत्री इ’स्तीफ़ा देता है तो वो पूरी मंत्रिमंडल का इस्ती’फ़ा माना जाता है. ऐसे में सभी को फिर से शपथ लेनी होगी. महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल हालाँकि चाहते हैं कि उद्धव को चुनाव का सामना करना ही पड़ेगा.

इस बारे में महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व सचिव अनंत कलसे ने एक मीडिया चैनल को बताया कि इसमें क़ानूनी पेंच तो है, हालाँकि ये पूरी तरह राज्यपाल के विवेक पर ही निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि इसमें भी एक पेंच है कि अगर राज्यपाल ने उन्हें मनोनीत कर दिया तो उन्हें 6 साल का समय मिलेगा या 6 जून 2020 तक का ये भी समझना पड़ेगा.

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