मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में आज का दिन काफ़ी अहम् है. राज्य में सरकार बन पाएगी या राष्ट्रपति शासन लगेगा इसका फ़ैसला आज शाम तक हो जाना है. इस बीच बड़ी ख़बर आ रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बीच फ़ोन पर बात हुई है. इसके साथ ही अब ये लगभग तय हो गया है कि कांग्रेस शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार को अपना समर्थन देगी.

इसके पहले एनसीपी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने पार्टी की कोर ग्रुप मीटिंग के बाद कहा कि हम कांग्रेस के फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं..हमने साथ में चुनाव लड़ा है और हम जो भी तय करेंगे साथ ही में तय करेंगे. मलिक ने कहा कि कांग्रेस के विधायक शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना चाहते हैं लेकिन कांग्रेस वोर्किंग समिति पार्टी की सुप्रीम बॉडी है तो वही इस पर फ़ैसला करेगी.

जानकार मानते हैं कि कांग्रेस इस सरकार को बाहर से समर्थन देगी. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ शिवसेना का मुख्यमंत्री और एनसीपी का उपमुख्यमंत्री होगा. उल्लेखनीय है कि आज सुबह शिव सेना मंत्री अरविन्द सावंत ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया है.इसके साथ ही NDA से शिवसेना ने ख़ुद को अलग कर लिया है.

शिवसेना नेता संजय राउत ने अपने बयान में कहा है कि ये भाजपा का घमण्ड है कि उन्होंने महाराष्ट्र में सरकार बनाने से मना कर दिया. राउत ने कहा कि ये महाराष्ट्र के लोगों का अपमान है.. वो विपक्ष में बैठ जाएँगे लेकिन 50-50 फ़ॉर्मूला नहीं मानेंगे जिसको चुनाव से पहले मान रहे थे.इसके पहले कल महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने राज्य की दूसरी बड़ी पार्टी से से कहा है कि वो महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए इच्छा जताएं.

भले ही इससे केंद्र सरकार पर किसी तरह की कोई मुसीबत नहीं आएगी लेकिन भाजपा को कई मायनों में बड़ा झटका लगा है. महाराष्ट्र में भाजपा जीत का जश्न मना रही थी लेकिन वो जीत कर भी सरकार न बना सकी. भाजपा के बारे में पिछले कुछ सालों से कहा जा रहा है कि वो हार को भी जीत में बदल लेती है लेकिन इस बार उसके साथ उल्टा हो गया.

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