नई दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह और स्मृति ईरानी के लोकसभा चुनाव जीतने से ख़ाली हुई दो राज्यसभा सीटों में से एक को जीतने की आस लगाए बैठी कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट ने झ’टका दे दिया है.ये दोनों सीटें गुजरात की हैं.कांग्रेस चाहती थी कि दोनों सीटों पर एक ही दिन और एक ही साथ चुनाव कराए जाएँ लेकिन चुनाव आयोग ने दोनों सीटों पर एक दिन तो चुनाव कराने का फ़ैसला किया है लेकिन चुनाव अलग-अलग होगा.

एक साथ चुनाव होने की स्थिति में जीत के लिए 60 वोटों की दरकार होगी जबकि अलग-अलग होने पर जीत के लिए 88 वोटों की. दिलचस्प ये है कि गुजरात में कांग्रेस के 71 विधायक हैं और भाजपा के 100. ऐसे में अलग-अलग चुनाव होने पर भाजपा आसानी से दोनों सीटें जीत लेगी जबकि कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं आयेगा. परन्तु एक साथ चुनाव होने की स्थिति में कांग्रेस एक सीट जीतने में कामयाब रहेगी.

असल में चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार मानें तो अमित शाह को लोकसभा चुनाव जीतने का प्रमाणपत्र 23 मई को ही मिल गया था, जबकि स्मृति ईरानी को 24 मई को मिला. इससे दोनों के चुनाव में एक दिन का अंतर हो गया. इसी आधार पर आयोग ने राज्य की दोनों सीटों को अलग-अलग माना है, लेकिन चुनाव एक ही दिन होंगे. कांग्रेस लेकिन इस मामले में शांत बैठने की स्थिति में नहीं लग रही.

कांग्रेस नेता मान रहे हैं कि अगर नतीजा उनके पक्ष में न आया तो वो चुनाव के बाद फिर सुप्रीम कोर्ट जाएँगे. असल में राज्यसभा का चुनाव एक फोर्मुले के हिसाब से होता है जो इस प्रकार है. W= [T/(S+1)] +1. इसमें W का अर्थ जीत के लिए ज़रूरी वोट है और T का मतलब कुल वोटरों की संख्या, S का मतलब कुल खाली सीटें. इसी फोर्मुले के आधार पर कांग्रेस एक सीट जीतने की उम्मीद लगा रही थी. इसी फोर्मुले से हमें ये पता चलता है कि अगर अलग-अलग दोनों सीटों के लिए चुनाव होंगे तो प्रत्येक सीट जीतने के लिए 88-88 वोट चाहिए होंगे जबकि एक साथ होने पर 59.33 यानी कि 60.

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