कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास और भारत का प्रदर्शन..

एक समय ये कहा जाता था कि ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज कभी नहीं ढलता. इस बात का अर्थ ये था कि ब्रिटेन की हुकूमत इतने देशों में है कि हर समय किसी न किसी देश में तो सूरज निकला ही होता था. उन्नीसवीं शताब्दी के अंत होते होते ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर पहुँच गया और बीसवीं शताब्दी के शुरू में ही साम्राज्य को राजनीतिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कई देशों में आज़ादी के लिए आन्दोलन होने लगे. जहाँ देशों में राजनीतिक बहस तेज़ थी वहीं खेलों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही थी. इसी समय कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला ख़याल समझदार लोगों के ज़हन में आया. चलिए शुरू से समझते हैं कॉमनवेल्थ गेम्स और उसके इतिहास को..

इतिहास:

सबसे पहले सन 1891 में जॉन एस्टले कूपर ने ब्रिटिश एम्पायर को ये सुझाव दिया कि ब्रिटिश एम्पायर के अधीन आने वाले सभी देशों के बीच सामंजस्य बनाने के लिए हर चार साल में एक बार खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना चाहिए. कूपर की बात जब आम लोगों तक पहुँचीं तो ऑस्ट्रेलिया, न्यू ज़ीलैंड और दक्षिण अफ़्रीका जैसे देशों में कूपर समितियाँ बनने लगीं. ये बात इस तेज़ी से फैलने लगी कि पिअर दे कोउबेर्तीं के कानों तक भी पहुँची. इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने आधुनिक ओलिंपिक गेम्स के लिए पहल की जिसके बाद उन्हें आधुनिक ओलिंपिक खेलों का जन्मदाता कहा जाने लगा.

बात ने इस क़दर ज़ोर पकड़ा कि ख़ास मौक़ों पर खेलों का विशेष आयोजन होने लगा. सन 1911 में जॉर्ज पंचम के कोरोनेशन के मौक़े पर पहली बार इंटर-एम्पायर चैंपियनशिप का आयोजन हुआ. ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, कनाडा, दक्षिण अफ़्रीका और यूनाइटेड किंगडम ने इन खेलों में भाग लिया. इन खेलों में जिस तरह का खेल-स्तर रहा उसकी कुछ पत्रकारों ने जमकर आलोचना की. कनाडा के पत्रकार मेलविल मार्क्स रॉबिन्सन को लेकिन ये idea बहुत पसंद आया.

वो इसके लिए हर संभव प्रयास करने लगे और सन 1930 में पहली बार ब्रिटिश एम्पायर गेम्स खेले गए. टूर्नामेंट कनाडा के हैमिल्टन में हुआ और इसमें 11 देशों ने भाग लिया. इंग्लैंड मैडल तालिका सबसे ऊपर और दूसरे स्थान पर कनाडा रहा. भारत इन खेलों का हिस्सा 1934 में बना. लन्दन में खेले गए इस टूर्नामेंट में भारत को एक पदक मिला, भारत के लिए राशिद अनवर ने रेसलिंग में कांस्य पदक जीता.

1938 में ये गेम्स ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हुए. भारत इस बार कोई भी पदक जीतने में नाकाम रहा. इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया और 1942 और 1946 में ये टूर्नामेंट नहीं खेला गया. अगला टूर्नामेंट 1950 में हुआ. 1950 तक आते आते ब्रटिश साम्राज्य बहुत कमज़ोर पड़ने लगा. कनाडा, दक्षिण अफ़्रीका और न्यूज़ीलैंड को 1939 में आज़ादी मिल गई लेकिन ये देश कॉमनवेल्थ के अंतर्गत ही रहे, मतलब इन देशों में हेड ऑफ़ द स्टेट आज भी ब्रिटेन की महारानी हैं. 1947 में भारत को आज़ादी मिली लेकिन भारत का बँटवारा हुआ तो पाकिस्तान नामक एक नया देश बना.

1950 के खेल द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति और शीत युद्ध की शुरुआत के बाद खेले जाने थे. न्यूज़ीलैंड के औकलैंड में खेलों का आयोजन हुआ. मलेशिया ने पहली बार इन खेलों में हिस्सा लिया, भारत ने इस बार खेलों में हिस्सा नहीं लिया. 1954 में इस खेल का नाम ब्रिटिश एम्पायर और कॉमनवेल्थ गेम्स कर दिया गया, कनाडा के वैन कूवर में हुए इस आयोजन में 24 देशों ने हिस्सा लिया. भारत ने इस बार खेल में हिस्सा लिया लेकिन भारतीय खिलाड़ियों में से कोई भी पदक नहीं जीत सका.

1958 में ये खेल वेल्स के कार्डिफ़ में खेले गए, इसमें 36 देशों ने भाग लिया, भारत को इस बार तीन पदक मिले जिनमें दो गोल्ड मैडल भी थे. सातवें गेम्स में 35 देशों ने हिस्सा लिया. ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हुई इस प्रतियोगिता में भारत कोई भी पदक जीतने में नाकाम रहा. 1966 में ये खेल जमैका में खेले गए. इस बार 34 देशों ने भाग लिया. इस बार भारत का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा. भारत ने 10 पदक जीते जिसमें से तीन स्वर्ण भी थे.

1970 में इस खेल को ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स कहा गया. ऐसा पहली बार हुआ जब इसके नाम से एम्पायर शब्द हट गया. इस बार 42 देशों ने भाग लिया. भारत ने 5 स्वर्ण के साथ 12 पदक जीते.

1974 में ये खेल न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए. भारत ने 4 स्वर्ण और कुल 15 पदक जीते. 1978 में ऐसा पहली बार हुआ जब इस खेल को सिर्फ़ कॉमनवेल्थ गेम्स कहा जाने लगा. 46 देशों ने खेल में भाग लिया, भारत को 5 स्वर्ण के साथ 15 पदक मिले. 1982 में कॉमनवेल्थ गेम्स ब्रिसबेन में हुए, इस बार भारत ने 5 स्वर्ण के साथ 16 पदक जीते.

1986 के कॉमनवेल्थ गेम्स का बड़े स्तर पर बॉयकाट किया गया. कॉमनवेल्थ में आने वाले उनसठ देशों में से 32 देशों ने प्रतियोगिता में भाग लेने से मना कर दिया. दक्षिण अफ़्रीका में रंग-भेद नीति लागू हो गई थी लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट थेचर दक्षिण अफ़्रीका के प्रति उदार रुख़ अपनाए हुए थीं. थैचर की इस नीति के विरोध में भारत समेत अधिकतर देशों ने खेल में हिस्सा नहीं लिया. ये खेल एडिनबरा में खेले गए.

1990 के खेल कहाँ खेले जाएँगे इसके आयोजन के लिए 1984 में वोटिंग हुई और ऐसा पहली बार था कि भारत भी मुख्य दावेदार बना. हालाँकि अंत में महज़ एक वोट से राजधानी नई दिल्ली को आयोजन का मौक़ा नहीं मिल सका. न्यूज़ीलैंड के औकलैंड को 20 और नई दिल्ली को 19 वोट मिले. 1990 के खेलों में 55 देशों ने भाग लिया. भारत टूर्नामेंट की पदक तालिका में पाँचवें स्थान पर रहा, भारत को 32 पदक मिले जिनमें से 13 स्वर्ण पदक थे.

1994 में ये खेल विक्टोरिया में खेले गए, भारत ने कुल 24 पदक हासिल किए जिनमें से 6 स्वर्ण पदक रहे. ये प्रदर्शन पिछली बार की तुलना में निराशाजनक रहा.

1998 में खेल मलेशिया के कुआलालंपुर में खेले गए. भारत को 25 पदक मिले जिनमें से 7 गोल्ड थे. कॉमनवेल्थ के कुल 70 देशों में से 69 ने इन खेलों में हिस्सा लिया. 2002 में ये खेल मेनचेस्टर में खेले गए. कुल 72 देशों ने खेल में हिस्सा लिया और ये आख़िरी बार था कि ज़िम्बाब्वे ने इन खेलों का हिस्सा बना. इसके बाद ज़िम्बाब्वे ने अपने आपको कॉमनवेल्थ से अलग कर लिया. इस बार भारत ने पहले से बहुत बेहतर प्रदर्शन किया. कुल 69 पदक के साथ भारत चौथे स्थान पर रहा, भारत ने इस बार 30 गोल्ड मैडल जीते. 2002 में भारत की महिला हॉकी टीम ने भी स्वर्ण पदक जीता.

2006 में कॉमनवेल्थ गेम्स मेलबर्न में खेले गए. इस बार 71 देशों ने हिस्सा लिया. भारत को कुल 50 मैडल मिले जिनमें से 22 गोल्ड मैडल थे.

सन 2003 में ये फ़ैसला भी होना था कि 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स कहाँ हों, भारत ने एक बार फिर दावा पेश किया लेकिन कनाडा ने भी अपने पक्ष में दावा पेश किया. कनाडा हैमिलटन में ये आयोजन कराना चाहता था वहीं भारत नई दिल्ली में. कई बार भारत दावा कर चुका था और कई बार मामला बहुत क़रीब भी आ चुका था लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल सकी थी. इस बार भी जब वोटिंग का समय नज़दीक आने लगा तो हैमिल्टन के पक्ष में अधिक देश नज़र आ रहे थे.

दूसरे राउंड की वोटिंग से पहले भारत ने बड़ी घोषणा की और कहा कि अगर नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए तो भारत सरकार हर देश को 1 लाख डॉलर देगी, साथ ही एयर टिकट से लेकर रहने-खाने तक की सब ज़िम्मेदारी भारत की होगी. इस ऑफर ने सारा खेल पलट दिया और नई दिल्ली के पक्ष में 46 वोट पड़े जबकि हैमिल्टन को 22 ही वोट मिल सके.

भारत ने शानदार तैयारियाँ कीं और दिल्ली मेट्रो से लेकर सड़कों तक को कॉमनवेल्थ गेम्स के हिसाब से तैयार किया. अपनी मेज़बानी में भारत ने एक बेहतरीन टूर्नामेंट कराया. इस बार होम-ग्राउंड का फ़ायदा भी भारत के खिलाड़ियों को मिला और भारत ने पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल कर लिया. भारत को 38 गोल्ड मिले और कुल 101 पदक. ये अब तक भारत का सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस है. ऑस्ट्रेलिया ने पदक तालिका में टॉप किया.

2014 में ये खेल ग्लासगो में हुए. भारत को कुल 64 पदक मिले जिनमें से 15 गोल्ड मैडल थे. 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए. भारत ने इस बार तीसरा स्थान हासिल किया. भारत को कुल 66 पदक मिले जिनमें से 26 गोल्ड मैडल थे. ऑस्ट्रेलिया ने पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया.

2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स बर्मिंघम में खेले गए. इस बार भारत ने 61 पदक हासिल किए जिसमें 22 गोल्ड, 16 सिल्वर और 23 ब्रोंज़ मैडल हैं. ऑस्ट्रेलिया ने सबसे अधिक 178 और दूसरे नम्बर पर मेज़बान इंग्लैंड को 176 पदक मिले. पदक तालिका में कनाडा के 92 पदक रहे और वो तीसरे स्थान पर रहा, भारत ने इस बार चौथा स्थान हासिल किया.

About Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

View all posts by Arghwan Rabbhi →

Leave a Reply

Your email address will not be published.