CM ममता के मंत्रियों और नेताओं को CBI ने किया गिरफ़्तार, “दीदी” ने CBI ऑफिस पहुँचते ही..

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में सियासी पारा एक बार फिर गर्मा गया है. एक तरफ़ जहाँ राज्य में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर सीबीआई ने ममता बनर्जी सरकार में कैबिनेट मंत्री और तृणमूल नेताओं को गिरफ़्तार कर राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है. कथित नारदा घोटाले से सम्बंधित जाँच के सिलसिले में सोमवार को सीबीआई ने कैबिनेट मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया.

सीबीआई की टीमों ने सोमवार सुबह इनके घर व अन्‍य ठिकानों पर छापेमारी की थी और फिर पूछताछ के लिए दफ्तर ले गई थी. यह खबर मिलते ही टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी भी पीछे-पीछे सीबीआई दफ्तर पहुंच गईं, वह फिलहाल अंदर ही मौजूद हैं. इससे पहले राज्य के मंत्री और TMC के बड़े नेता फिरहाद हाकिम ने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने उन्हें वजह बताए बिना गिरफ्तार कर लिया है.

हालांकि सीबीआई ने तब कहा था कि उसने किसी को गिरफ्तार नहीं किया है. हालांकि पूछताछ के बाद सीबीआई ने बताया कि इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है. सीबीआई की टीम सुबह मंत्री फिरहाद हकीम के घर पहुंची थी. टीम ने उनके घर की तलाशी ली थी. इसके बाद उन्‍हें पूछताछ के लिए अपने साथ ऑफिस ले गई.

वहीं सीबीआई ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल जगदीप धनखड़ से नारदा घोटाले की जांच के संबंध में अनुमत भी मांगी थी. सीबीआई की ओर से फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोभन चटर्जी के खिलाफ केस चलाने के लिए यह अनुमति मांगी गई थी. चुनाव के बाद राज्‍यपाल की ओर से सीबीआई को इसकी अनुमति दी गई थी.

हालाँकि पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर को इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी. पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने कहा कि उच्च न्यायलय के आदेश के अनुसार किसी भी विधायक की गिरफ़्तारी से पहले स्पीकर को जानकारी देना और उनसे इजाज़त लेना ज़रूरी है, इस केस में ऐसा कुछ नहीं हुआ है. दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीबीआई दफ्तर पहुँची हैं और उन्होंने सीबीआई को चेतावनी दी है कि उन्हें भी गिरफ़्तार किया जाए.

बता दें कि नारदा घोटाला 2016 विधानसभा चुनाव के समय का है. चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप जारी किए गए थे. इन टेप में टीएमसी के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों जैसे दिखने वाले लोगों को कथित रूप से फेक कंपनी के लोगों से पैसे लेते दिखाया गया था. बताया गया था कि ये टेप 2014 के हैं. इ

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