चिराग पासवान के अध्यक्ष बनने पर चाचा पशुपति पारस के मन में रह गई थी कसक, जिसके बाद अब…

पटना: लोकजनशक्ति पार्टी में रामबिलास पासवान के नि’धन के बाद से पार्टी के नेतृत्व को लेकर खीं’चातानी शुरू हो गई। चाचा भतीजे के बीच की कहानी को नदीम ने बताया है। बिहार विधानसभा चुनाव में लोकजनशक्ति पार्टी के बे’कार प्रर्दशन करने की वजह चिराग पासवान के निर्णयों को बताया गया। जिसके बाद चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच ट’कराव शुरू हो गया। जिसके परिणामस्वरूप पशुपति के नेतृत्व में ब’गावत होने से पार्टी में फूट पड़ गई। 2014 में जब देश मे मोदी सरकार आई। उस समय रामबिलास पासवान को मंत्री बनाया गया। दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था, एनडीए में शामिल होने का फैसला बिल्कुल सही निकला।

मैं मंत्री पद की बधाई तो ले सकता हूँ मगर एनडीए का हाथ थामने की बधाई आप लोग चिराग को दीजिये। उन्होंने आगे कहा था कि जब कांग्रेस से उन्हें कोई जवाब नही मिला था तब वो बड़े दु’विधा में थे कि उन्हें किसके साथ जुड़ना चाहिए। ऐसी स्थिति से चिराग ने बाहर निकाला, चिराग ने कहा पापा आपको एनडीए में शामिल होना चाहिए। चिराग को अध्यक्ष पद देने को लेकर उन्होंने कहा था कि चिराग उनका बेटा है इसलिए ही वो उन्हें अध्यक्ष नही बना रहे बल्कि चिराग को इसलिए अध्यक्ष बनाया जा रहा है क्योंकि उनमें आने वाले कल को पहचानने की दृष्टि है।

चिराग अपना करियर बॉलीवुड में बनाना चाहते थे। उन्होंने बीटेक की पढ़ाई बीच मे छोड़कर मुंबई जाने का फैसला किया। 2011 में उनकी पहली फिल्म आई, नाम था- मिलें न मिलें हम। इस फिल्म में कंगना रनौत, नीरू बाजवा और सागरिका घाटगे जैसे कलाकार शामिल थे। फिल्म को उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली। दूसरी तरफ देश मे 2014 के आम चु’नाव नज़दीक थे। रामबिलास ने अपने बेटे चिराग को किसी तरह राजनीति के लिए हामी भरवाई। 2014 में चिराग पहली बार सांसद बने जिसके बाद फिर उन्होंने 2019 का चुनाव जीता। लेकिन रामबिलास के निधन के बाद विधानसभा चुनाव जब हुए तब एनडीए से उनके समीकरण ख’राब हो गए।

5 नवंबर 2019 को दिल्ली में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में चिराग पासवान को लोक जनशक्ति पार्टी का अध्यक्ष चुने जाने का प्रस्ताव पशुपति कुमार पारस ने ही रखा था। रामबिलास को इस बात की भनक लग गई थी कि अपने सामने जन्मे चिराग का अध्यक्ष बनना उनसे हज़म नही होगा। रामबिलास ने पशुपति से चिराग को अध्यक्ष बनाये जाने का प्रस्ताव सबके सामने इसलिए रखवाया ताकि यह संदेश जा सके कि परिवार में चिराग को लेकर कोई मतभेद नही है। हालांकि, चिराग के लिए शुरू से ही परिवार में सबकुछ इतना आसान नही था।

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