कुछ ऐसे देश हैं जो क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज़ से बहुत छोटे ज़रूर हैं लेकिन उनकी स्ट्रेटेजिक इम्पोर्टेंस बहुत है। अक्सर करके इसकी वजह उनकी लोकेशन होती है। कुछ इसी तरह की स्थिति हौ भारतीय सागर में स्थित देश मालदीव की। मालदीव एक छोटा सा देश है जिसकी अधिकतर जनता मुस्लिम धर्म को मानती है।

इसकी आबादी भारत के किसी भी महानगर से कम है लेकिन ये देश भारत और चीन दोनों के लिए अहम माना जाता है। चीन हमेशा इस कोशिश में रहता है कि वो मालदीव को बफर स्टेट की तरह बना ले परंतु भारत भी इसको लेकर सक्रिय रहता है। भारत और चीन के विवाद में कई बार मालदीव फँसता नज़र आता हैं । मालदीव इस समय चीन के 3 बिलियन डॉलर क़र्ज़ में डूबा हुआ है।

पश्चिमी देश चीन पर इल्ज़ाम लगाते रहे हैं कि चीन इस तरह का क़र्ज़ देशों को देता है कि वो चुका न पाएँ जिसके बाद उनके राजनीतिक मामलों में उसका दख़ल मज़बूत हो जाये। दूसरी ओर चीन का ये दावा है कि वो उन देशों को भी क़र्ज़ देता है जिनको पश्चिमी देश किसी तरह की मदद नहीं करते और ये किसी राजनीतिक दख़ल के लिए नहीं है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने इस बारे में एक बयान देकर कहा कि वो मालदीव की मदद करता रहेगा और इसका कोई राजनीतिक इरादा नहीं है। उल्लेखनीय है कि भारत सागर में स्थित मालदीव्स की लोकेशन ऐसी है जिसकी वजह से चीन भारत पर को घेरने के लिए मालदीव्स का इस्तेमाल करना चाहता है. इस बात को समझते हुए भारत चीन को इस तरह का कोई मौक़ा नहीं देना चाहता. यही वजह है कि दोनों देशों के लिए मालदीव्स बहुत महत्वपूर्ण है.

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