बसपा के बड़े नेता ने सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में दिया बयान, जल्द ही होगा फ़ैसला..

बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने भले ही गठबंधन तोड़ दिया हो लेकिन सपा और बसपा के कुछ नेता ऐसे हैं जो अभी भी इस कोशिश में लगे हैं कि गठबंधन वापिस हो जाए. इसको लेकर अभी से ही कोशिशें शुरू हो गई हैं. बसपा के कुछ नेताओं का मानना है कि सपा से गठबंधन तोड़ने के बाद भी किसी तरह की ग़लत बयानबाज़ी से सभी को बचना चाहिए. इससे कोई फ़ायदा होने की बजाय नुक़सान ही होगा. सपा के नेता तो लगातार ये कह रहे हैं कि ये गठबंधन दो पार्टियों का नहीं बल्कि समुदायों का था.

बहुजन समाज पार्टी के सांसद मलूक नागर ने भी इस बारे में एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बीएसपी और सपा का गठबंधन टू-टा नहीं है.उन्‍होंने कहा कि अभी सपा-बसपा का गठबंधन है,ना तो मायावती और ना ही अखिलेश यादव ने गठबंधन तो’ड़ा है.टीवी पर सिर्फ अफ़वाह चल रही है,अभी सिर्फ उपचुनाव अकेले ल’ड़ेंगे,विधानसभा चुनाव 2022 में साथ लड़ने पर फैसला जल्द मायावती लेंगी.

इससे पहले लोकसभा चुनाव 2019 और उससे पहले संसदीय सीटों पर हुए उपचुनावों के लिए सपा के साथ किए गए छह महीने पुराने गठबंधन से नाता तोड़ते हुए बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को कहा कि भविष्य में पार्टी सभी छोटे-बड़े चुनाव अपने बूते पर लड़ेगी.गौरतलब है कि आम चुनाव के नतीजों के बाद मायावती ने अब तक केवल उत्तर प्रदेश की 12 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में ही अकेले चुनाव लड़ने की बात कही थी लेकिन सोमवार को उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी भविष्य के सभी चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ेगी.

अपने इस बयान से बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी से करीब छह महीने पुराना गठबंधन लगभग खत्म कर दिया है.रविवार को बसपा के वरिष्ठ नेताओं,सांसदों और विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी,जिसके अगले ही दिन मायावती का यह बयान सामने आया.मायावती ने सोमवार को एक साथ तीन ट्वीट किये और समाजवादी पार्टी पर जबरदस्त हमला किया.

Mayawati

बसपा सुप्रीमो के भविष्य में सभी चुनाव अकेले लड़ने के बयान पर सपा के राष्ट्रीय महासचिव रमाशंकर विद्यार्थी ने मायावती पर सामाजिक न्याय की लड़ाई कमजोर करने का आरोप लगाया और कहा कि बसपा प्रमुख घबराहट में सपा के विरुद्ध बयानबाजी कर रही हैं.बलिया में उन्होंने सोमवार को संवाददाताओ से बातचीत के दौरान कहा,‘‘बसपा सुप्रीमो मायावती घबराहट में सपा के खिलाफ बयानबाजी कर रही हैं.’’

उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती पर सामाजिक न्याय की लड़ाई कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा,‘‘बसपा सुप्रीमो के सपा से गठबंधन तोड़ने के एलान के बाद से दलित समाज तेजी से सपा से जुड़ रहा है. दलित समाज अखिलेश जी में विश्वास करने लगा है,इससे बसपा सुप्रीमो घबरा गई हैं.’’ बसपा सुप्रीमो के सपा पर आरोप लगाने को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जनता इस सच्चाई से वाकिफ है कि गठबंधन की मालकिन ने क्या किया है.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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