बसपा के लिए प्रत्याशी भी ढूँढना हुआ मुश्किल, सबसे मज़बूत गढ़ में भी ये हाल..

June 22, 2021 by No Comments

लखनऊ: बसपा के दिन इन दिनों बुरे चल रहे हैं। रोज़ाना बसपा को कोई न कोई झ’टका लगता ही रहता है। 2007 का विधानसभा चुनाव हा’रने के बाद से बसपा अब तक उबर नही पाई है। पहले तो बसपा की वोट बैंक रही जातियों ने बहनजी से कन्नी काट ली उसके बाद नेता भी बसपा से अपना दा’मन छुड़ाने में लग गए। एक के बाद एक नेता या तो अन्य दूसरी पार्टियों में चले गए या तो मयावती ने उन्हें खुद पार्टी से निकाल कर किनारे कर दिया। कभी बसपा के ‘नील दुर्ग’ नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले में अब बसपा को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़वाने के लिए प्रत्याशी ढूंढने पर भी नही मिल रहे।

1998,1999, 2004 में मायावती को संसद भेजने वाले जिले में आसमानी रंग अपने ढलान पर है। एक समय ऐसा भी था जब बसपा का अम्बेडकर की पाँचों विधासनसभा की सीटों पर कब्ज़ा रहा करता था। इतना ही नही सांसद और पंचायत सदस्यों से लेकर पंचायत अध्यक्ष तक का पद बसपा की झोली में जाकर ही गिरता था। समय के साथ अब हालात बदल गए हैं। आज बसपा को भाजपा, सपा को टक्कर देने के लिए प्रत्याशी मिलना भी मुश्किल हो गया है। बसपा ने जिस को पंचायत अध्यक्ष बनवाने के लिए रणनीति तय की थी वो जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में जीत हांसिल नही कर पाया था।

आपको बताते चलें कि अम्बेडकर नगर में बसपा के बड़े नेता रहे लालजी वर्मा जैसे नेताओं को भी बहनजी ने किनारे लगा दिया है। लालजी वर्मा एक ऐसे नेता थे जो बसपा की संस्थापक सदस्यों में से एक थे। पंचायत चुनावों में अम्बेडकर नगर में बसपा के अंदर टिकट को लेकर चल रही ल’ड़ाई खुलकर सामने आ गयी थी। लालजी वर्मा ने भी अपनी पत्नी को दिया गया बसपा का पंचायत चुनाव टिकट वापस कर दिया था। इसी के बाद ही मायावती ने उन्हें पार्टी ने निष्काषित कर बाहर का रास्ता दिखाया था।

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