इस तरह अंग्रेज़ों ने मुसलमानों को दिया था धोखा, अब तक चल रहा…

April 11, 2021 by No Comments

इस बात में शायद ही किसी को संदेह हो कि ब्रिटिश सरकार ने लगातार हिन्दू-मुस्लिम में फूट डाली और उसकी ही फ़सल काटी। परंतु अंग्रेज़ों की ये नीति सिर्फ़ भारत तक ही नहीं सीमित थी। उन्नीसवीं शताब्दी के “ग्रेट गेम” में अफ़ग़ान और सिख लड़ते रहे और इसका फ़ायदा ब्रिटेन या रूस को होता रहा। हम लेकिन बात करने जा रहे हैं फ़िलिस्तीन मुद्दे की जड़ के बारे में। बात प्रथम विश्व यु-द्ध की है, फ़िलिस्तीनी क्षेत्र तब उस्मानिया सल्तनत के अंदर आता था। यहूदी लोग बहुत समय से इस क्षेत्र की माँग उस्मानिया सल्तनत से कर रहे थे लेकिन सुल्तान अब्दुल हमीद द्वित्तीय ने इसे देने से मना कर दिया। उन्होंने इससे भी बड़ा क्षेत्र देने की बात कही लेकिन यहूदी नेता इस बात पर राज़ी न हुए, उन्हें ‘प्रॉमिस्ड लैंड’ ही चाहिए था। अब्दुल हमीद द्वित्तीय ने कहा कि क्योंकि यहाँ सैंकड़ों साल से मुस्लिम आबादी बसी हुई है तो ये ज़मीन यहूदी समुदाय को देना उनके साथ अन्याय होगा। वक़्त गुज़रा और ‘यंग तुर्क’ ने सुल्तान की सरकार को धराशायी कर दिया, अब उस्मानिया साम्राज्य पर ‘यंग तुर्क’ का राज हो गया और सुल्तान सिर्फ़ नाममात्र का सुल्तान रह गया।

‘यंग तुर्क’ ने सत्ता तो अपने हाथ ले ली लेकिन सरकार चलाना उनके बस का नहीं लग रहा था। इस समय तुर्की, जर्मनी, ऑस्ट्रिया हंगरी साथी देश थे और यही वजह है कि जब विश्व यु-द्ध शुरू हुआ तो जर्मनी के साथ इस जं-ग में तुर्की और ऑस्ट्रिया हंगरी भी कूदे। सेंट्रल पावर्स के नाम से जाने जाने वाले ये देश मज़बूत लग रहे थे वहीं रूस, ब्रिटेन और फ़्रांस कमज़ोर। ब्रिटेन यु-द्ध जीतने की हर संभव कोशिश कर रहा था इसीलिए उसने अपने साथ कई देशों को मिलाने की कोशिश की। ब्रिटेन ने इसी समय सऊदी अरब के शेख़ से गुप्त-समझौता किया कि जं-ग जीतने पर फ़िलिस्तीन मुस्लिम समाज के सुपुर्द कर दिया जाएगा। 1917 में रूस में क्रांति के आसार बनने लगे, इसी समय ब्रिटेन ने चाईम वाइज़मैन नामक साइंटिस्ट के साथ डील की कि यु-द्ध समाप्ति पर फ़िलिस्तीन का हिस्सा यहूदी समुदाय को मिलेगा। इसका अर्थ हुआ कि ब्रिटेन ने एक ही ज़मीन का हिस्सा दो लोगों से कर लिया। इसके अतिरिक्त एक तीसरी गुप्त डील भी हुई।

ये डील फ़्रांस और ब्रिटेन के बीच हुई। तय ये हुआ कि जीता हुआ हिस्सा फ़्रांस और ब्रिटेन बाँट लेंगे। इसका अर्थ ये हुआ कि ब्रिटेन ने मुस्लिमों को और यहूदियों को दोनों को धोखा दिया। यु-द्ध में सेंट्रल पावर्स की हार हुई और हार के बाद फ़्रांस और ब्रिटेन ने जीता हुआ हिस्सा बाँट लिया। इसको लेकर मैंडेट सिस्टम निकाला गया, फ़िलिस्तीन ब्रिटेन के हिस्से आया। फ़िलिस्तीन में अंग्रेजों की ग़लत नीतियों की वजह से यहूदी आतं-की संगठन ‘हैगनाह’ की गतिविधियां तेज़ हो गई, क्षेत्र में अचानक यहूदी आबादी बाहर देशों से आने लगी।

क्षेत्र में बड़े स्तर पर फ़साद होने लगे। इसी दौर में हिटलर का उदय भी है, हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों पर इतने ज़ु-ल्म किए कि उन्हें जर्मनी से भागना पड़ा, ऐसे में बड़ी संख्या में ये लोग फ़िलिस्तीन में बस गए। 1943 में इस पूरे विषय में अमरीका भी आ गया। ब्रिटेन से लेकिन फ़िलिस्तीन संभल नहीं रहा था। इसीलिए अचानक ही ब्रिटेन ने फ़िलिस्तीनी मैंडेट छोड़ दिया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने फ़िलिस्तीन और इजराइल दो देशों का निर्माण किया लेकिन इजराइल ने फ़िलिस्तीन पर लगातार ज़ु-ल्म जारी रक्खे, ‘हैगनाह’ को ही इजराइल की मिलिट्री बना दिया गया। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन ने प्रथम विश्व यु-द्ध के दौरान मक्का के शरीफ़ से वादा किया था कि वो फ़िलिस्तीन मुस्लिम को देगा.

Tags: ,

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *