प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बिहार में एनडीए के लिए राह आसान नहीं है. बीते कुछ समय से एनडीए में सीट बंटवारों को लेकर माथापच्ची जारी है, मगर अब ऐसी खबर है कि उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा के बाद अब रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा भी 2014 चुनाव के मुकाबले कम सीटों पर मानने वाली नहीं है. बता दे कि पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) प्रमुख रामविलास पासवान से मंगलवार को मुलाकात की. समझा जा रहा है कि दोनों नेताओं ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में सीटों के बंटवारे के फार्मूले पर खुश नही है . कुशवाहा ने पासवान के आवास पर उनसे मुलाकात की और सीट बंटवारे के मुद्दे पर चर्चा की.

दरअसल उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा के बाद अब रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा भी 2014 चुनाव के समान ही लोकसभा चुनाव 2019 में उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजेपी और जेडी (यू) बिहार में कुल 40 सीटों में से 34 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती हैं. उसके बाद जो सीटें बचती हैं, उसमें से लोजपा और रालोसपा के बीच बंटवारा होगा.

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी में बीजेपी ने 22 सीटें जीती थीं. वहीं केंद्रीय मंत्री रामविलास की पार्टी लोजपा 7 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिसमें से 6 सीटों पर उसकी जीत हुई थी. इसके अलावा, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा की पार्टी ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था और तीनों सीटें अपने नाम की थी. 

बता दे कि बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर के सीट शेयरिंग फार्मूला पर कहा कि 50-50 फॉर्मूला का मतलब कुछ भी हो सकता है. इसका संकेत तो यह भी हो सकता है कि कि बीजेपी और जेडी (यू) केवल 10-10 सीटों लड़ेंगे, शेष 20 अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ देंगे. वहीं, रालोसपा का कहना है कि वह एनडीए में तीन सीटों से कम पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगी. यानी रालोसपा को तीन सीट से कम मंजूर नहीं. 

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