कहते हैं कि तस्वीरें बोलती हैं लेकिन कई बार तस्वीरों में एक ख़ामोशी भी होती है. पिछले दिनों नज़र से एक किताब गुज़री, शानदार तस्वीरों से भरी इस किताब का नाम है ‘स्पीति’, हिमाचल प्रदेश में स्थित स्पीति घाटी के अलग-अलग रँग और रूप दिखाने वाली इस किताब के पहले पन्ने से ही इसमें रूचि बढ़ जाती है.

महत्वपूर्ण जानकारियों और दिल छू लेने वाली तस्वीरों के साथ जब हम इस किताब का सफ़र शुरू करते हैं तो कई बार इस बात को सोचने लगते हैं कि क्या महेंद्र सिंह की ये किताब पूरा न्याय करती है. सच कहें तो कभी लगता है कि उन्होंने पूरा न्याय कर लिया है जबकि कभी लगता है कि इसमें अभी गुंजाइश है. किताब कई मायनों में ख़ास है, ज़मीन की बात से शुरू करके इतिहास से गुज़रते हुए ये नए दौर तक पहुँचती है.

इस किताब के ज़रिए हमें ये मालूम चलता है कि स्पीति अभी भी अपने इतिहास से जुड़ा हुआ है. महेंद्र सिंह ने अलग-अलग तरह से सोचते हुए इस किताब को मुकम्मल किया है.’स्पीति’ से पहले उनकी ‘लद्दाख़’ भी सराहनीय किताब है. ‘लद्दाख़’ की तरह ये भी एक ख़ास तहज़ीब की चर्चा करते हुए जाती है. किताब छोटी-छोटी बातों को भी ख़ास तवज्जो देती है और साथ ही किसी बड़े पड़ाव को लाँघती नहीं है.

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