यौ’न शो’षण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के फ़ैसले पर ओवैसी का ब’यान,’यदि महाराष्ट्र सरकार इसके..’

January 25, 2021 by No Comments

मुम्बई: बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फ़ै’सले ने कई लोगों को चौं’का दिया है। ये फ़ै’सला ऐसा है कि कई लोग इसकी च’र्चा कर रहे हैं और माँ’ग कर रहे हैं कि इस फ़ै’सले की फिर से विवे’चना हो. इसी फ़े’हरिस्त में एक नाम जु’ड़ गया आल इंडिया मज’लिस ए इ’त्तिहा’दुल मुस्लि’मीन के अध्यक्ष असद उद्दीन ओवैसी का. ओवैसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फ़ै’सले पर नि’राशा व्यक्त की है जिसमें कहा गया है कि किसी नाबा’लिग के ब्रे’स्ट को क’पड़े के ऊपर से छू’ना यौ’न शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा.

ओवैसी ने माँ’ग की महाराष्ट्र की सरकार इस फ़ै’सले के ख़ि’लाफ़ अ’पील करे. ओवैसी ने कहा कि अगर रा’ज्य सरकार ऐसा नहीं करती है तो बच्चों की रक्षा के लिए किया जा रहा सं’घर्ष क’मज़ोर पड़ जाएगा. हैदराबाद के सांसद असुद्दीन ओवैसी ने रविवार को ट्वीट में कहा, “यह कहने के लिए बा’ध्य हूं कि यह कतई बेतु’का और बेहद निरा’शाजनक है… यदि महाराष्ट्र राज्य सरकार इसके खिला’फ अपी’ल नहीं करती है, और इन वि’चारों को ख’त्म कर देने (मि’टा देने) की मां’ग नहीं करती है, तो इससे यौ’न अपरा’धों से बच्चों की रक्षा करने के लिए किया जा रहा संघ’र्ष क’मज़ोर प’ड़ जाएगा… किसी भी की’मत पर ऐसा नहीं होने देना चाहिए…”

आपको बता दें कि बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ की न्यायमू’र्ति पुष्पा गनेडीवाला ने 19 जनवरी को पा’रित एक आदेश में कहा कि यौ’न ह’मले का कृत्य माने जाने के लिए “यौ’न मं’शा से त्वचा से त्वचा का सं’पर्क (Skin to Skin Contact) होना” जरूरी है. म’हज़ छूना भर यौ’न ह’मले की परिभाषा में नहीं आता है. न्यायमूर्ति गनेडीवाला ने एक सत्र अदाल’त के फैस’ले में संशो’धन किया, जिसने 12 वर्षीय ल’ड़की का यौ’न उत्पी’ड़न करने के लिए 39 वर्षीय व्यक्ति को तीन वर्ष कारा’वास की स’जा सुनाई थी.

इस केस से जु’ड़ी एक गवाही के मुताबिक़, दिसंबर 2016 में आरो’पी सतीश नागपुर में ल’ड़की को खाने का कोई सा’मान देने के ब’हाने अपने घर ले गया. उच्च न्यायालय ने अपने फै’सले में यह द’र्ज किया कि अपने घर ले जाने पर उसने ब’च्ची का ब्रे’स्ट छु’आ और उसके क’पड़े उता’रने की कोशिश की. अब इस पर उच्च न्यायलय ने टिप’ण्णी की है कि ल’ड़की को क’पड़े के ऊपर से छू’ने की कोशिश की गई है इसलिए ये यौ’न ह’मला नहीं है और यह भारतीय दं’ड संहि’ता की धा’रा 354 के तह’त म’हिला के शी’ल को भं’ग करने का अ’पराध है. धारा 354 के तह’त जहां न्यूनतम स’जा एक वर्ष की कै’द है, वहीं पोक्सो कानू’न के तह’त यौ’न ह’मले की न्यूनतम स’जा तीन वर्ष का’रावास है.

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