पटना: बिहार में इस समय राजनीतिक हलचल तेज़ है और हो भी क्यूँ न, क्यूँकी इसी वर्ष बिहार में विधानसभा चुनाव जो होने हैं. बिहार चुनाव से पहले तरह तरह की ख़बरें मीडिया में आने लगी हैं कि नीतीश कुमार और भाजपा के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. हालाँकि नीतीश ने इन बातों को ख़ारिज किया और कहा कि जदयू NDA के साथ ही मिलकर ही चुनाव में उतरेगी. उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए CAA के विषय पर भी अपना पक्ष रखा.

नीतीश कुमार ने सफ़ाई से कहा कि अल्पसंख्यक समाज के साथ उपेक्षा या अन्याय बर्दाश्त नहीं कर सकते. लेकिन उन्होंने मुस्लिम समाज के लोगों से कहा कि अगर नया नागरिक क़ानून ग़लत भी है तो सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए. नीतीश कुमार ने फिर कहा कि एनआरसी लागू नहीं होगा और एनपीआर भी 2010 में जो हुआ है उसी आधार पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भ्रम की स्थिति से ग़’रीब गुरबा को दिक्कत आ सकती है.

नीतीश ने अपने कार्यकर्ताओं को कहा कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के साथ मुलाक़ात का कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कन्फ़्यूज़न फैलाते हैं लेकिन कभी लोग किसी से मिलते रहते हैं. नीतीश कुमार के पटना के गांधी मैदान में दिए भाषण से साफ़ था कि वो एनडीए के नेता के रूप में चुनाव में जाएंगे जहां वो अपने 15 वर्षों के शासनकाल बनाम लालू-रबड़ी के 15 वर्षों के काम काज पर जनता से वोट मांगेंगे.

नीतीश कुमार ने कहा कि अगली बार मौक़ा मिला तो हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने का संकल्प उन्होंने अभी से ले लिया है. अपने भाषण में नीतीश इस तरह बात कर रहे थे मानो वो प्रशांत किशोर के सवालों के जवाब दे रहे हैं. इससे जानकार ये अंदाज़ा लगा रहे हैं कि नीतीश को अपनी सत्ता जाने का डर भी है. नीतीश इस बात से भी नाराज़ दिखे कि सम्मलेन में भीड़ कम थी. उन्होंने कहा भी कि आयोजकों को चाहिए कि टेंट का इंतज़ाम किया करें ताकि लोग गर्मी में बैठ पायें.

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