पटना: कल का दिन बिहार की राजनीति में एक उथल- पुथल भरा दिन रहा। ख़बर है कि लोजपा के 6 में से 5 सांसदों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के ख़िलाफ बगावत कर दी है और बाग़ियों का नेतृत्व कोई और नही चिराग पासवान के चाचा व स्व’र्गीय रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस कर रहे हैं जो कि स्वंय भी लोजपा के सांसद हैं।

अभी पिछले वर्ष हुए राज्य के विधानसभा सभा चुनाव में लोजपा ने एनडीए में रहते हुए भी जेडीयू के प्रत्यशियों ख़िलाफ़ अपने प्रत्याशी उतार कर नीतीश कुमार को काफी नुकसान पहुंचाया था। वोट कटने के कारण ही नीतीश कुमार की पार्टी तीसरे नम्बर की पार्टी बनकर रह गयी है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त का बदला नीतीश कुमार ने लोजपा के पांच सांसदों को तोड़कर लिया है।

पार्टी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओमप्रकाश बिड़ला को पत्र लिखकर मांग की है कि उन सभी बागी सांसदों को अलग दल का दर्जा दिया जाए. पत्रकारों के पूछने पर बागी सांसद पशुपति पारस ने कहा कि उन्होंने ये कदम लोजपा को बचाने के लिए उठाया है न की तोड़ने के लिए। उन्होंने कहा कि चिराग से उन्हें कोई बैर नही है वो उनके भतीजे हैं उन्होंने ये भी कहा कि विधानसभा चुनावों में लिए गए फैसलों से पार्टी के 99% कार्यकर्ता खुश नही थे।

माना जा रहा है कि शीघ्र ही ये सारे बागी सांसद जेडीयू में अपना विलय करेंगे। इसके साथ ही लोकजनशक्ति पार्टी के ऊपर अस्तित्व का सवाल खड़ा हो गया है. चिराग पासवान कोशिश में हैं कि ये बग़ावत शांत हो जाए. इसको लेकर उन्होंने बाग़ी नेताओं के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि वह पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार हैं. वह अपनी माँ रीना पासवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की बात कर रहे हैं.

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