इस सहयोगी पार्टी ने NDA को उलझाया, शिवसेना की राह पर चलने की..

September 29, 2020 by No Comments

जैसे जैसे बिहार चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वैसे वैसे NDA की मज़बूती कमज़ोर होती दिख रही है. राष्ट्रीय स्तर पर इस समय NDA के सभी बड़े सहयोगी उसका या तो साथ छोड़कर चले गए हैं या कमज़ोर हो गए हैं. भाजपा की सबसे बड़ी सहयोगी इस समय जदयू बची है. बिहार NDA की एक और सहयोगी लोजपा इस समय भाजपा से तो नाराज़ नहीं है लेकिन जदयू से नाराज़ दिख रही है. इसके पीछे कारण क्या है ये भी की ख़ास बाहर नहीं आ पाता.

लोजपा का व्यवहार इस समय जिस तरह का है बिलकुल वैसा ही व्यवहार महाराष्ट्र चुनाव से पहले शिवसेना का था. शिवसेना चुनाव से पहले भाजपा से नाराज़ थी, दोनों में विवाद चल रहा था लेकिन अंत में शिवसेना ने भाजपा के साथ मिलकर ही चुनाव लड़ा. चुनाव संपन्न होने के बाद जब शिवसेना को लगा कि उसकी स्थिति ऐसी है कि वो एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना सकती है तो उसने भाजपा के सामने शर्त रखी कि मुख्यमंत्री उसका होगा.

शिवसेना के इस दाँव को भाजपा जब तक समझ पाती तब तक शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस दोनों को भरोसे में ले लिया था. तो अब सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या लोजपा शिवसेना वाली तकनीक इस्तेमाल कर रही है.लोजपा जानती है कि कांग्रेस और राजद किसी भी क़ीमत पर नहीं चाहेंगे कि भाजपा-जदयू फिर से सरकार में आयें और ऐसे में जब लोजपा के पास कुछ सीटें होंगी तो वो मुख्यमंत्री पद की माँग भी कर सकती है. इस बार जो एक बात अलग है वो ये कि लोजपा भाजपा से नहीं बल्कि जदयू से नाराज़ है. परन्तु वक़्त पलटने पर पासवान अगर राजद-कांग्रेस के साथ चले जाएँ तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है.

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