वैश्वीकरण के इस युग में, अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं का महत्व दोगुना हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, जहां अरबी दुनिया की तीसरी भाषा है, वहां फारसी बोलने वालों के लिए भी रोजगार के मैदान में अच्छा अवसर प्राप्त है। लेकिन बिहार प्रांत की राज्य सरकार ने अरबी-फ़ारसी भाषाओं के साथ अपनी दुश्म’नी का प्रदर्शन किया है।

बिहार सरकार द्वारा हाई स्कूल और हायर सेकंडरी में शिक्षकों के भरती के लिए अधिसूचना जारी किया गया. लेकिन अरबी फारसी एवं मैथिली को इसमें कोई स्थान नहीं दिया लेकिन बाद में मैथिली को सम्मिलित कर लिया गया.दिलचस्प बात यह है के बिहार सरकार सौतेला व्यवहार उन भाषाओं के साथ कर रही है जो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पाठ्यक्रम में सम्मिलित है जो मैट्रिक और इंटर के परीक्षा के अनिवार्य ग्रुप में शामिल है.

लेकिन इसके बावजूद अरबी फारसी भाषा की भर्ती न निकलना उन भाषाओं के साथ सरकार का रवैया संदेह जनक हैं. हालांकि यह भाषायें अंतराष्ट्रीय स्तर पर बोली जाती है. और इस वैश्वीकरण के दौर में गूगल, फेसबूक, यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया साइट पर इन भाषाओं के जानने वाले के लिए बहुत सारे रोज़गार के अवसर प्राप्त हैं. इन भाषाओं को सीखकर जल्दी रोज़गार प्राप्त करने का ख्वाब देख रहे छात्रों में काफी आक्रोश है.

अरबी फारसी भाषा में अपना भविष्य तलाश करने वाले छात्र मोहम्मद आबशारुद्दीन का कहना है कि अगर इन भाषाओं में भर्ती नहीं निकाली गई तो हम सड़क से न्यायपालिका तक संघर्ष करने के लिए तैयार है उन्होंने कहा कि हम व तमाम वामपंथी छात्र संघथनों से सम्पर्क में हैं जो जल्द ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिती व शिक्षा मंत्री और नीतीश कुमार को एक विज्ञापन भेजेंगे और तमाम अरबी फारसी भाषा के जानकार को लामबन्द करेंगे.
(ये ख़बर स्वतंत्र पत्रकार आबशारुद्दीन से प्राप्त हुई है, हमारी टीम ने इसको एडिट नहीं किया है.)

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