पटना. बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में चुनाव को लेकर गतिविधि भी हो रही है. हालाँकि पहले जहाँ ज़मीन पर प्रचार प्रसार होता अब सोशल मीडिया पर ही सब पार्टियाँ लगी हुई हैं. कोरोना वायरस की वजह से लॉक डाउन ने ऐसी स्थिति पैदा की है कि पार्टियों के लिए चुनाव में अभियान चलाना मुश्किल हो गया है. इसको देखते हुए पार्टियाँ नई रणनीति पर विचार कर रही हैं तो बिहार के डिप्टी सीएम ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसके बाद बिहार सियासत में ‘आ गया है.

उन्होंने एक बयान में 2020 बिहार विधानसभा चुनाव को ऑनलाइन या डिजिटल प्लेटफार्म पर कराये जाने की संभावना जता दी. बिहार की ज़्यादातर पार्टियाँ इस तरह के चुनाव के सीधे ख़ि’लाफ़ हैं. राज्य की सबसे बड़ी पार्टी राजद भले ही विपक्ष में हो लेकिन उसका राज्य की सियासत पर दबद’बा अभी भी बना हुआ है. राजद जोकि ईवीएम के भी ख़िला’फ़ मानी जाती है, वो डिजिटल इलेक्शन की बात पर ग़ु’स्से में है. राजद का कहना है कि उनकी पार्टी ग़’रीबों और पिछड़ों की ल’ड़ाई ल’ड़ती रही है.

लालू यादव के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि गांव के वो मतदाता जिन्हें न तो सही से पढ़ना-लिखना आता है और जिन बेचारों के पास मोबाइल फोन तक नसीब नहीं है, वो भला स्मार्ट फोन और डिजिटल वोटिंग कैसे कर पाएंगे. ये बीजेपी की एक काल्पनिक सोच है जो वोटरों पर बेवजह थोपना चाहती है. आरजेडी के नेता भाई वीरेंद्र कहते हैं कि बिहार में वैसे भी यह ऑनलाइन वोटिंग कभी संभव नहीं है. इस कोरोना त्रासदी के बीच डिजिटल इलेक्शन की बात करना हसुआ के ब्याह में खुर्पी के गीत के समान है.

इसी बात को आधार मानकर कांग्रेस ने भी डिजिटल वोटिंग की मुख़ालिफ़त की है. कांग्रेस से एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा कहते हैं कि दरअसल भाजपा लोगों को गुमराह करने में लगी है. भाजपा जिस डिजिटल फ़ॉर्मूला को लेकर बात रख रही है उससे जदयू को भी परेशानी हो रही है. जदयू के नेता साफ़ कह रहे हैं कि इस तरह से चुनाव होना ठीक नहीं है.

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