बिहार चुनाव को लेकर मुस्लिम महापंचायत का बयान,’मुसलमान विकास के मुद्दों पर वोट करें..’

October 26, 2020 by No Comments

बिहार मुस्लिम महापंचायत की ओर से बिहार चुनाव के लिए एक घोषणा पत्र जारी किया गया है. इस पत्र में कुछ मुद्दों का ज़िक्र किया गया है और समुदाय से अपील की गई है कि इन्हीं को आधार मानकर अपने वोट करें. बिहार मुस्लिम महापंचायत के मुख्य संयोजक मोहम्मद काशिफ यूनुस इस पत्र के बारे में कहते हैं कि सत्ता और विपक्ष के राजनीतिक दलों के द्वारा समाज के पिछड़े तबके के मुद्दों पर बोलने में हिचकिचाहट देखी जाती है। समाज के पिछड़े हुए तबके जैसे मजदूर, महिला, SC की जातियां, झुग्गी में रहने वाले लोग, किसान , इन सबके मुद्दे चुनावी मुद्दा नहीं बन पाते हैं और पूरा चुनाव दो-तीन मुद्दों के आसपास भटक कर रह जाता है।

उन्होंने कहा कि कोई पाकिस्तान, तो कोई मंदिर-मस्जिद के मुद्दे पर चुनाव लड़ता रहता है और जन-सरोकार के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि विशेष प्रयास से जन-सरोकार के मुद्दों को चुनावी मुद्दा बनाया जाए। इसके लिए सामाजिक संगठन समय-समय पर जन सरोकार के मुद्दों को इकट्ठा कर, अपना घोषणा पत्र जारी करते रहते हैं। इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम समाज के द्वारा आज एक ‘मुस्लिम घोषणापत्र’ जारी किया गया है।

वो कहते हैं कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम समाज आज देश के एक बहुत ही पिछड़े हुए समाज में शामिल है। इसलिए यह जरूरी है कि इस समाज के विकास से जुड़े हुए मुद्दों को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। इसी विशेष प्रयास का एक नाम मुस्लिम घोषणापत्र है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम घोषणा पत्र को लेकर बिहार मुस्लिम महापंचायत बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्र में जाएगा और वहां की जनता को इस बात पर सजग करेगा कि वह उन्हीं उम्मीदवारों और दलों को अपना वोट दें जो मुस्लिम घोषणापत्र के मुद्दों पर काम करने के लिए तैयार हों।

मुस्लिम घोषणापत्र में कुल 18 मुद्दे दिए गए हैं. जिनमें कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे इस प्रकार हैं. मुसलमानों और दलितों के प्रोटेक्शन के लिए विशेष कानून बनाना, CAA, एनआरसी के प्रदर्शनकारियों पर से मुकदमा वापस लेना, मुसलमानों को नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में 11% आरक्षण देना, मॉब लिंचिंग के केस में डीएम और एसपी पर जिम्मेदारी डाल कर उन्हें सस्पेंड करना, मदरसों का मॉडर्नाइजेशन, पांचवी क्लास तक मातृभाषा में शिक्षा, अल्पसंख्यक लड़कियों के लिए दलित लड़कियों के जैसा शिक्षा का इंतजाम करना, मुस्लिम युवाओं के लिए कोचिंग संस्थानों की स्थापना करना, सीमांचल के सभी जिलों में AIIMS पैटर्न का अस्पताल बनाना, शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के कामकाज का सोशल ऑडिट करवाना ताकि वक्त संपत्तियों के संबंध में होने वाले भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सके, अल्पसंख्यक इसकीमो का बजट बढ़ाया जाना और इस बात को सुनिश्चित करना कि अल्पसंख्यक स्कीमों का पैसा वापस नहीं लौटे बल्कि पूरी तरह से खर्च हो, एवं दूसरे कई महत्वपूर्ण मुझे भी दिए गए हैं।

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