भारत पर्वो का देश है यहाँ विभिन्न धर्मो के लोग त्यौहार उत्सव के तरह मनाते है.भारत की बहुसंख्यक आबादी हिन्दू है,हिन्दू धर्म में बहुत से त्यौहार है.दीपावली इस धर्म का बड़ा त्यौहार है,दीपावली के ठीक बाद भाई दूज त्यौहार मनाया जाता है.रक्षा बंधन की तरह ये भाई बहन का त्यौहार है.आगे हम बतायेंगे भाई दूज दीपावली के ठीक बाद ही क्यों मनाया जाता है उसके बाद हम इस पर्व को मनाने की विधि बतायेंगे.

जानिए क्यों मनाया जाता है भाईदूज
इस साल नौ नवम्बर को भाई दूज मनाया जाना है.इस पर्व का संदर्भ कई पुराणों में मिलता है,ऐसा माना जाता है कि भगवान सूर्य नारायण की पत्नी ने यमराज और यमुना नाम के दो बच्चो को जन्म दिया था.यमुना यमराज से हमेशा कहती थी कि वो अपने मित्रो के साथ उनके घर आकर भोजन करे लेकिन यमराज नही आते थे.

लेकिन एक दिन यमुना ने यमराज को अपने घर आने का वचन दिया जिसके बाद यमराज यमुना के घर आये जिस पर यमुना की ख़ुशी का ठिकाना ना रहा.बहन यमुना ने स्नान करके पूजा किया और उसके बाद यमराज को भोजन कराया.इस दिन के बाद यमुना ने भाई यमराज से हर साल ऐसे ही आने को कहा.जिस दिन ये घटना हुई थी उसी दिन से ये त्यौहार हर वर्ष मनाया जाता है.इसके बाद बहन यमुना के लिए यमराज हर वर्ष आते रहे.यमुना और यमराज द्वारा स्थापित किये गये संस्कार को तब से मनाया जाता है.

जानिए क्या है विधि
भाई दूज का पर्व मनाने के लिए बहनों को अपने भाइयों से तेल मंगवाना चाहिए और गंगा या यमुना के जल में स्नान करना चाहिए लेकिन अगर ऐसा संभव ना हो तो तो सिर्फ जल का ही इस्तेमाल किया जा सकता है.ये करने के बाद भाई और बहन को नए कपडे पहनकर शुभ मुहूर्त में बहन द्वारा भाई को तिलक लगाना चाहिए.

तिलक लगाने से पहले भाई को तख़्त पर बिठा कर हाथ में एक श्रीफल देना चाहिए उसके बाद तिलक लगाना चाहिए.तत्पश्चात बहन को भाई के माथे पर हल्दी और चावल का तिलक लगाना चाहिए.इसके अलावा बहनों को यमराज के नाम का दिया जलाकर घर के द्वार पर रखना चाहिए.

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