इजराइल के आम चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिल पाने की वजह से राजनीतिक हलचल बनी हुई थी. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी उम्मीदों के मुताबिक़ नतीजे हासिल करने में नाकामयाब रही. लिकुद पार्टी कुल 31 सीटों पर जीत हासिल कर सकी जबकि उसकी विरोधी ब्लू एंड वाइट पार्टी को 33 सीटें प्राप्त हुईं. इजराइल की क्नेस्सेट (लोकसभा) में कुल 120 सीटें हैं. ऐसे में साफ़ है कि कोई भी पार्टी अकेले दम पर बहुमत हासिल करने में नाकाम रही है.

बेंजामिन नेतान्याहू को अब देश की अरब पार्टी ने बड़ा झटका दिया है. इजराइल की मुख्य अरब पार्टी ने प्रधान मंत्री नेतनयाहू को सत्ता से बाहर करने के लिए चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतने वाली ब्लू एंड वाइट को समर्थन की घोषणा कर दी है. एक वेबसाइट में छपी ख़बर के मुताबिक़ रविवार को जोइंट लिस्ट के नेता अयमन ओदेह ने कहा, इस समर्थन का मतलब गैंट्ज़ की नीतियों या स्वयं उनकी पुष्टि करना नहीं है, बल्कि नेतनयाहू को सत्ता से दूर रखना है।

गैंट्ज़ की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी 17 सितम्बर को हुए आम चुनाव में 33 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, जबकि नेतनयाहू की लिकुद पार्टी केवल 31 सीटें ही जीत सकी है। जबकि अरब गठबंधन को 13 सीटें प्राप्त हुई हैं और वह सबसे अधिक सीटें जीतने में तीसरे नम्बर पर है। इस्राईल में सरकार के गठन के लिए 61 सीटों की ज़रूरत होती है। ओदेह ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए कहा, नेतनयाहू को सत्ता से बाहर रखने के लिए यह अहम क़दम उठाया गया है और इसके बाद उनका राजनीतिक जीवन ही ख़त्म हो जाएगा।

ग़ौरतलब है कि अवैध अधिकृत इलाक़ों में अभी भी 20 प्रतिशत फ़िलिस्तीनी नागरिक रहते हैं, जिन्हें ज़ायोनी शासन की नस्लवादी और रंगभेदी नीतियों का सामना करना पड़ता है। चुनाव प्रचार के दौरान नेतनयाहू ने वादा किया था कि अगर वह चुनाव जीत जाते हैं तो पश्चिमी तट की जॉर्डन घाटी का अवैध अधिकृत इलाक़ों में विलय कर देंगे। आपको बता दें कि गैंट्ज़ भी इसी तरह की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन अब उनका दावा है कि वह फ़िलिस्तीनियों के साथ तथाकथित शांति चाहते हैं और वह ट्रम्प प्रायोजित तथाकथित डील ऑफ़ द सेंचरी पर भी चुप्पी साधे रहे हैं। फ़िलिस्तीनियों ने बड़े पैमाने पर अमरीकी राष्ट्रपति की इस योजना का विरोध किया है।

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