कोलकाता: रविवार को पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुना’व के नती’जे आ गए। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने इस बार फिर से बाजी मार ली। वहीं भाजपा बंगाल की सत्ता का स्वा’द चखने से पी’छे रह गई। बिहार में बेहतरीन प्रदर्श’न के बाद बंगाल के चुनाव में अपने सियासी रास्ते खोजने के लिए उतरे AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के सपने बिख’र गए।

ओवैसी को बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं का साथ नहीं मिला। मुस्लिम मतदाताओं ने AIMIM से ज्यादा ममता बनर्जी को अपना समर्थन दिया है। इसका ये नतीजा हुआ कि बंगाल की सभी सातों सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है। AIMIM को एक भी सीट नहीं मिल सकी। असदुद्दीन ओवैसी ने सात सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।

उन्होंने मुस्लिम आबा’दी वाले क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतारे थे साथ ही मुस्लिम प्रत्याषियों को ही टिकट भी दिया था लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। AIMIM ने बिहार की तर्ज पर बंगाल में मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस किया था, लेकिन बिहार की तरह वो मुस्लिमों के दिल नहीं जीत पाए। लेकिन ममता बनर्जी ने ओवैसी के सपनो पर पानी दिया। AIMIM के उम्मीदवारों की जमानत भी ज’ब्त हो गई क्योंकि वो हजार वोट भी पार नहीं कर सके हैं।

इतहार सीट पर करीब 52 फीसदी मुस्लिम वोटर होने के बाद AIMIM के प्रत्याशी मोफाककर इस्लाम एक हजार वोट भी हासिल नहीं कर सके। सागरदिघी सीट पर 65 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जहां से AIMIM के नूरे महबूब आलम ने चुनाव ल’ड़ा था। यहां से टीएमसी के सुब्रत साहा ने तीसरीबार जीत दर्ज की। महबूब आलम पांच सौ वोट भी प्राप्त नहीं कर सके।

रतुआ सीट पर भी एआईएमआईएम के प्रत्याशी दानिश रजा हा’र गए साथ ही अपनी ज़मानत भी खो बैठे। जालंगी सीट की बात करें तो यहां मुस्लिम आबादी 73 फीसदी है। ओवैसी ने अल शौकत जमान को यहां से चुनाव में उतारा था लेकिन यहां भी उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई।

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