बंगाल में भाजपा के 2 विधायकों ने दिया इस्तीफ़ा, सरकार न बन पाने…

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद राज्य में एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का डं’का बज रहा है। राज्य में हुए चुनाव के नतीजे घोषित हुए कई दिन हो चुके हैं। जिसके बाद अब भी राज्य में सियासी घमासान थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के 2 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है।

इसके बाद अब विधानसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या 77 से घटकर 75 हो चुकी है। यह दोनों ही सांसद हैं यह विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने थे लेकिन इनका सांसद बने रहना पार्टी को ज्यादा ठीक लगा। जानकार मानते हैं कि अगर पार्टी बहुमत के आंकड़े के क़रीब होती तो ये दोनों विधायक बने रहते लेकिन अब पार्टी को इनके सांसद बने रहने से ही ज्यादा फ़ायदा दिख रहा है.

इसी तरह राणाघाट के बीजेपी सांसद जगन्नाथ सरकार नदिया जिले के शांतिपुर से जीतकर विधायक बने, लेकिन दोनों ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। प्रमाणिक ने कहा, “हमने पार्टी के फैसले का पालन किया है। पार्टी ने फैसला किया है कि हमें अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे देना चाहिए।”

बताया जाता है कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 4 लोकसभा सांसदों को भी मैदान में उतारा था। प्रमाणिक और सरकार के अलावा भाजपा ने लॉकेट चटर्जी और बाबुल सुप्रियो को चुनावी दंगल में उतारने का फैसला लिया था। जबकि राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता पांचवे सांसद थे।

दासगुप्ता ने तारकेश्वर सीट से अपना नामांकन दाखिल करने से पहले इस्तीफा दे दिया था, मगर वह विधानसभा चुनाव हार गए। लॉकेट चटर्जी और बाबुल सुप्रियो भी हार गए। इस मामले में तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, “बीजेपी ने बंगाल चुनाव में चार लोकसभा सांसद और एक राज्यसभा सांसद को मैदान में उतारा था।

उनमें से तीन चुनाव हार गए और दो जीते। इन दो विजयी विधायकों ने आज इस्तीफा भी दे दिया। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी ने चुनाव में शून्य हासिल करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।” आपको बता दें कि चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हुई हिं’सा को लेकर भाजपा जहां सत्तारूढ टीएमसी के ऊपर ह’मलावर है।

वहीं ममता सरकार इसे एक सा’जिश बता रही है। हिं’सा की घ’टनाओं को लेकर शपथ ग्रहण समारोह में भी सीएम ममता बनर्जी और राज्यपाल के बीच आ’रोप-प्र’त्यारोप होते हुए नजर आए।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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