बंगाल चुनाव के बाद शिवसेना ने दिए ये संकेत, “कांग्रेस के बिना कोई…”

पश्चिम बंगाल में मिली निराशाजनक हार ने भाजपा के बड़े नेताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है. दूसरी ओर विपक्ष तृणमूल कांग्रेस की जीत से बहुत उत्साहित है. देश भर में बंगाल चुनाव के बाद राजनीतिक गलियारों में अलग माहौल है. भाजपा ने पूरी ताक़त लगाई थी लेकिन 100 का आँकड़ा नहीं छू सकी थी वहीं तृणमूल ने अकेले दम पर 200 का आँकड़ा पार कर लिया.

बंगाल चुनाव के बाद एक बार फिर ये चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि भाजपा के ख़िलाफ़ देशभर में एक विपक्षी गठबंधन बने. महाराष्ट्र की सत्ता पर क़ाबिज़ शिवसेना के नेता संजय राउत ने इस बात के संकेत दिए हैं. उन्होंने रविवार के रोज़ कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के गठबंधन के गठन के लिए वार्ता आने वाले कुछ दिनों में शुरू होगी। राउत ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ चर्चा की है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के गठबंधन में कांग्रेस की अहम भूमिका होगी।

शिव सेना नेता ने कहा, ‘देश में विपक्षी दलों के मजबूत गठबंधन की जरूरत है। हालांकि बिना कांग्रेस पार्टी के ऐसा गठबंधन नहीं हो सकता। कांग्रेस की इसमें अहम भूमिका रहेगी। विचार-विमर्श के जरिए नेतृत्व पर फैसला किया जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियां महा विकास अघाड़ी का गठन करने के लिए साथ आईं और सर्वसम्मति से नेतृत्व उद्धव ठाकरे को दिया गया। यह एक आदर्श गठबंधन है जोकि अच्छा काम कर रहा है।’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने असम, केरल और तमिलनाडु में अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही जोकि अच्छी बात नहीं है। पार्टी को खुद को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। राउत ने कहा कि कांग्रेस की मौजूदगी पूरे देश में है, चाहे वह विपक्ष में हो या सरकार में।

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