बौखलाए फ़्रांस ने अमरीका और ऑस्ट्रेलिया से राजदूतों को बुलाया वापिस, चीन ने भी..

वाशिंगटन डीसी/पेरिस/कैनबेरा: अमरीका और फ़्रांस को यूँ तो पुराना साथी माना जाता है लेकिन ये भी बात सच है कि फ़्रांस विश्व युद्ध के बाद से कभी भी अपनी ताक़त को वापिस नहीं पा सका. अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ़्रांस में सबसे कमज़ोर फ़्रांस को ही माना जाता है. पिछले दिनों फ़्रांस ने उन क्षेत्रों में अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश की जिन इलाक़ों या देशों में कभी फ़्रांस ने राज किया था लेकिन इसमें भी उसे ख़ास कामयाबी नहीं मिली.

अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा घटनाक्रम में भी फ़्रांस का कोई रोल देखने-सुनने को नहीं मिला. ज़ाहिर है कि फ़्रांस लगातार कमज़ोर होता जा रहा है. ऐसे में उसके साथी भी शायद उसको अब उतना महत्व नहीं दे रहे हैं जिसका वह ख़ुद को हक़दार मानता है. असल में अमरीका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक सुरक्षा समझौता औकुस हुआ है. इस समझौते से फ़्रांस को सीधे तौर पर 100 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है.

बीबीसी के मुताबिक़ इस समझौते के तहत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया को न्यूक्लियर पन्नडुबी की तकनीक भी मुहैया करवाएगा. जानकारों का मानना है कि इस नए सुरक्षा समझौते को एशिया पैसेफ़िक क्षेत्र में चीन के प्रभाव से मुक़ाबला करने के लिए बनाया गया है. 50 सालों में यह पहली बार है जब अमेरिका अपनी पनडुब्बी तकनीक किसी देश से साझा कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने केवल ब्रिटेन के साथ यह तकनीक साझा की थी.


इस समझौते का सीधे तौर आर फ़्रांस ने विरोध किया है. जानकार मानते हैं कि फ़्रांस काफ़ी हताश है क्यूँकि इस समझौते की वजह से उसका ऑस्ट्रेलिया के साथ अरबों डॉलर का समझौता ख़त्म हो गया है. बुधवार के रोज़ बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने इसकी घोषणा की थी.

फ़्रांस को इस गठबंधन की सूचना इसके सार्वजनिक होने से कुछ ही घंटों पहले दी गई थी.फ़्रांस के विदेश मंत्री ज़्यां ईवरे द्रियां ने शुक्रवार रात को बयान जारी किया जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निवेदन पर राजदूतों को वापस बुलाया गया है. फ़्रांसीसी विदेश मंत्री ने कहा कि यह सौदा ‘एक अस्वीकार्य रवैया सहयोगियों और साझेदारों के बीच बनाता है जो कि सीधे तौर पर हमारे गठबंधनों, हमारे साझेदारों की दृष्टि और यूरोप में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के महत्व को प्रभावित करता है.’


दूसरी ओर अमरीका की ओर से फ़्रांस की स्थिति को लेकर खेद व्यक्त किया गया है. वाइट हाउस से जारी बयान में किसी भी विवाद को बातचीत से सुलझाने की बात की गई है. ‘मित्र राष्ट्र’ के नाम से जाने जाने वाले समूह के बीच आपस में राजदूतों का बुलाना एक असामान्य सी बात है. वॉशिंगटन डीसी में फ़्रांस के राजनयिकों ने पहले ही अमेरिका-फ़्रांस के संबंधों पर शुक्रवार को प्रस्तावित एक उत्सव को रद्द कर दिया था.

तीन देशों के बीच हुए इस समझौते के बाद ऑस्ट्रेलिया दुनिया में ऐसा चौथा देश बन जाएगा जिसके पास परमाणु पनडुब्बियां होंगी. इस सौदे के तहत ऑस्ट्रेलिया के साथ साइबर क्षमता, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और अन्य समुद्री तकनीक साझा की जाएंगी. इस घोषणा के बाद ऑस्ट्रेलिया के फ़्रांस के साथ 37 अरब डॉलर का सौदा समाप्त हो गया है. 2016 में हुए इस सौदे के तहत फ़्रांस ऑस्ट्रेलिया के लिए 12 पारंपरिक पनडुब्बियां बनाता.

चीन भी इस समझौते पर नाराज़ है और कह रहा है कि तीनों देशों ने ये समझौता एक छोटी सोच के साथ किया है और ये तीनों देश ‘शीत युद्ध की मानसिकता’ में ही हैं.

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