बर्फ़बारी में फिसला जवान का पैर, पाकिस्तान के क़’ब्ज़े वाले क्षेत्र में पहुँचा तो अब..

कहते हैं कि अगर जं’ग न हो तो दुनिया सुकून में आ जाए. दुनिया ऐसी कब होगी पता नहीं लेकिन जं’ग और जं’ग के होने का डर अपने आप में ऐसी चीज़ें हैं जिसने देशों की विदेश नीति को लगातार तय किया है. भारत के पड़ोस में पड़ने वाले पा’किस्तान में यूँ तो हमारे देश की तरह बहुत सी समानताये हैं और कहीं न कहीं हमारा कल्चर भी मेल खाता है लेकिन पाकिस्ता’न की सरकारों ने भारत वि’रोध की ऐसी नीति अपनाई है कि जं’ग का ख़तरा लगभग हमेशा ही बना रहता है.

ख़बर है कि भारत पाकिस्तान सीमा पर तैनात हवालदार राजेन्द्र नेगी सिंह के घरवाले इस समय बेहद प’रेशान हैं. इसका कारण ये है कि वो पिछले कई दिनों से लापता थे लेकिन अब ख़बर आयी है कि वो अपनी ड्यूटी करने के दौरान फिसल गए और ग़ल’ती से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पहुँच गए. नेगी के घरवाले सरकार से गुहार लगा रहे हैं. उनका कहना है कि जिस तरह विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान को पाकिस्तान से भारत लाया गया वैसे ही नेगी के लिए भी कोशिश हो.

ये घटना आठ जनवरी की है. वो कश्मीर के गुलमर्ग में ड्यूटी पर तैनात थे. उनकी प’त्नी राजेश्व’री के पास उनकी यूनिट से फोन आया जिसमें बताया गया कि उनके पति बर्फ़बारी के बाद से ही लापता हैं. कई घंटों बाद पता चल सका कि हवलदार नेगी का पैर फिसल गया था और वह एलओसी के दूसरी तरफ यानी पाकिस्तान में गिर गए। यह बात सुनते ही उनकी प’त्नी और परिवार के दूसरे सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।

से’ना के सूत्रों ने जानकारी दी है कि सर्च एंड रेस्कुए ऑपरेशन जारी है. ये भी कहा जा रहा है कि जो भी कूटनीतिक क़दम उठाये जाने चाहियें उठाये जा रहे हैं और पाकिस्तान से नेगी को वापिस लाने के प्रयास जारी हैं. हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी, देहरादनू के अंबीवाला सैनिक कॉलोनी के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2002 में गढ़वाल राइफल्स को ज्वॉइन किया था.

वह एक माह की छुट्टी के बाद अक्टूबर में यूनिट में वापस आए थे और फिर उनकी पोस्टिंग नवंबर में गुलमर्ग में हो गई थी। बताया जा रहा है कि नेगी का पैर फिसलने के एक या दो दिन बाद उनकी यूनिट से संपर्क किया गया था। जब से उनकी यूनिट की तरफ से परिवार को जानकारी दी गई है, तब से फोन की हर घंटी पर घरवालों को लगता है कि उनकी कई नई खबर आई है।

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