लखनऊ: अयोध्या भूमि विवाद का निपटारा सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की भावना को ध्यान में रखते हुए विवादित जगह राम जन्म भूमि को दे दी जबकि बाबरी मस्जिद के लिए भी जगह का प्रस्ताव किया. बाबरी मस्जिद के लिए 5 एकड़ ज़मीन देने की ज़िम्मेदारी सर्वोच्च अदालत ने सरकार को दी है. अब ख़बर है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने बाबरी मस्जिद के लिए ज़मीन तलाशना शुरू कर दिया है.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, यूपी सरकार ने अयोध्या ने नई मस्जिद निर्माण के लिए 5 ज़मीनों को चिन्हित किया है। इसके अंदर मलिकपुरा मिर्जापुर- शमशुद्दीनपुर और चांदपुर गांव में जमीन को चिन्हित किया गया है। ये सभी जमीन अयोध्या के पंचकोसी परिक्रमा से बाहर हैं। अब इन 5 जगहों में से कोई एक ही जमीन तय होगी। जहां नई मस्जिद का निर्माण होगा।

इसका फैसला अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पुर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सबसे पुराने विवाद को समाप्त करते हुए फ़ैसला सुनाया था. इस फ़ैसले के बाद विवाद ख़त्म होता दिख रहा है. कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद का निर्माण प्रमुख स्थल पर होना चाहिए और मंदिर के निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट का गठन किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि बाबरी मस्जिद को ६ दिसम्बर 1992 को एक हिं’सक भीड़ ने गिरा दिया था.

इसको लेकर कई भाजपा नेताओं पर भी मुक़’दमा चल रहा है. इस ज़मीन पर कुछ हिन्दू संगठन दावा करते हैं कि ये भगवान् राम की जन्मभूमि हैं और यहाँ एक भव्य हिन्दू मंदिर था जिसको तोड़ कर बाबरी मस्जिद का निर्माण मुग़ल बादशाह बाबर के समय कराया गया था. हालाँकि अदालत में ये बात साबित नहीं हो पाई कि बाबरी मस्जिद का निर्माण किन परिस्थितियों में हुआ, इसलिए ये बात भी साबित नहीं हो सकी कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर गिराया गया था या नहीं. अदालत ने मामले को ख़त्म करने के मक़सद से हल निकाला है.

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