नई दिल्ली: असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए यहां तीन चरणों में मतदान सम्पन्न हो गया है. पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव की चर्चा इस बार हिंदी बेल्ट में कुछ ज़्यादा ही हुई है. इस बार असम के चुनाव में काँटे की लड़ाई दिख रही है. कांग्रेस गठबंधन और भाजपा के बीच ये लड़ाई साख की भी है और ऐसे में असम विधानसभा चुनाव में एक और खास बात न’ज़र आ रही है। असम विधानसभा चुनाव के मैदान में राजस्थान की राजनीति छा’ई हुई है।राजस्थान के कई नेताओं ने असम में प्रचार किया है.

असम के चुनाव में राजस्थान के नेता बीजेपी और कांग्रेस गठबंधन के लिए अपनी राजनीतिक रणनीति की अहम भूमिका पेश करते हुए नज़र आ रहे हैं। यही वजह है कि असम का चुनाव राजस्थानी नेताओं के आस पास हो रहा है। असम प्रभारी कांग्रेस की चुनावी बा’गडोर एआईसीसी के महासचिव भंवर जितेंद्रसिंह ने थाम रखी है। तो वहीं, जितेंद्र और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कुछ प्रभावी राजस्थानियों की मदद से कांग्रेस गठबंधन बनाने में अपनी भूमिका निभाई है।

तो वहीं दूसरी तरफ गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा व वरिष्ठ मंत्री बीडी कल्ला ने असम के दो दिवसीय दौरा किया। साथ ही, प्रवासी राजस्थानियों को आकर्षित करने की कोशिश की। बता दें कि असम में रहने वाले राजस्थानी मूल के लोगों को बीजेपी का जनाधार माना जाता है। बात अगर भाजपा की करें तो, उसकी तरफ से राजस्थान का कोई बड़ा नेता नहीं आया, लेकिन फिर भी कई प्रवासी यहां प्रचार अभियान में जुटे रहे।

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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