असम जीतने के बाद भी मुश्किल में भाजपा?, दो गु’ट में बं’टे विधायक और दिल्ली से हुए…

देश के 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। जिनमें से 3 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पहले से ही यह कहा जा रहा था कि असम में एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी ही सत्ता कायम करेगी। जो की सही भी साबित हुआ है।

असम में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को शानदार जीत मिली है। लेकिन अब पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल में जहां एक बार फिर से ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद पर शपथ ग्रहण कर ली है। वहीँ असम में जीत हासिल करने के बावजूद भाजपा मुख्यमंत्री पद पर कौन सत्ता कायम करेगा।

इसका फैसला नहीं ले पा रही है। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 126 सदस्यीय विधानसभा वाले चुनाव में 75 सीटों के साथ बहुमत के पार सीटें हासिल की है। लेकिन, सीएम कौन बनेगा ये तय नहीं हो पाया है। गठबंधन में अकेले भाजपा को 33.21 फीसद मत पाकर 60 सीटें मिली हैं।

दरअसल भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक अब दो दलों में बंट चुके हैं। एक धड़ा जहां मौजूदा मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का समर्थन कर रहा है। तो दूसरा धड़ा हेमंत बिसवा सरमा को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहा है।

साल 2016 में हुए विधानसभा चुनाव पार्टी ने सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर चुनाव लड़ा था। जबकि, इस बार भाजपा ने चुनाव से पहले अपना मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया था। दरअसल पूरे मामले पर असम के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रंजीत कुमार दास का बड़ा बयान सामने आया है।

उनका कहना है कि मुख्यमंत्री का फैसला भाजपा संसदीय बोर्ड द्वारा किया जाएगा। पार्टी एक पर्यवेक्षक को भेज रही है। वह सभी पक्षियों से बात करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मंगलवार को गुवाहाटी पहुंचने की संभावना है। भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) ने इस चुनाव में नौ सीटें हासिल की हैं। जबकि पिछले चुनाव में सहयोगियों ने पांच ज्यादा सीटें हासिल की थी।

इसी तरह अन्य सहयोगी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने छह सीटें हासिल की हैं और उसने ये सभी सीटें बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के पाले से अपने पाले में कर ली हैं। बीपीएफ ने इस बार एनडीए से नाता तोड़कर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।

About Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

View all posts by Arghwan Rabbhi →

Leave a Reply

Your email address will not be published.