दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ जब कोई बड़ा नेता नहीं तैयार हुआ तो साध्वी प्रज्ञा को मिला टिकट?

पहले चरण के मतदान के बाद जो बातें चल रही थीं वो दूसरे चरण के बाद और तेज़ हो गई हैं। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ये मान चुका है कि पार्टी ये चुनाव हार चुकी है। अब किसी तरह से हार का अंतर कम करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा को सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश से लगता नज़र आ रहा है। उत्तर प्रदेश में जिन सीटों पर पहले चरण में मतदान हुआ है उसमें भाजपा को बड़ा नुक़सान होने की ख़बर है।

ख़बरें तो मध्य प्रदेश से भी अच्छी नहीं हैं। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता फ़िलहाल चुनाव लड़ने से बच रहे हैं। इसके पीछे कारण है कि यहाँ पार्टी की पोज़ीशन अच्छी नहीं है। यही वजह है कि जब भोपाल में दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ शिवराज सिंह चौहान और उमा भारती दोनों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया तो भाजपा को मजबूरी में प्रज्ञा ठाकुर को प्रत्याशी बनाना पड़ा।

कहीं न कहीं भाजपा को पता है कि दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ प्रज्ञा ठाकुर का जीतना मुश्किल है लेकिन इसके ज़रिए भाजपा बची हुए चरणों में कट्टर हिंदुत्व की बात को आगे रख सकती है. मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं की माने तो भाजपा यहाँ से किसी वरिष्ठ नेता को टिकट देना चाहती थी लेकिन कोई राज़ी न हुआ. आज दूसरे चरण का मतदान पूरा हो चुका है, ऐसे में जो रिपोर्ट आ रही हैं वो भाजपा के लिए अच्छी नहीं हैं. आने वाले समय में ये देखने की बात होगी कि भाजपा अपनी स्थिति को कुछ बेहतर कर पाती है कि नहीं.

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