इतिहास के पन्नों को पलटें तो ऐसे कई वाक़ये सामने आते हैं जिसमें पता चलता है कि जब कोई नेता अपने देश में किसी मामले से परेशान होता है तो वो पड़ोसी दुशमन का डर देश के लोगों को दिखाता है. कई सौ सालों से इसी तरह की चीज़ें चलती रही हैं और यही वजह है कि इस वक़्त ज़्यादातर पड़ोसी देशों की नहीं बनती है. अपने देश में अपने बारे में नकारात्मक चर्चा से बचने के लिए कुछ इसी तरह की बात इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने की है.

अरब मीडिया ने इस बात को नोटिस किया है कि प्रधानमंत्री नेतान्याहू इस समय इज़राइल में अपने प्रधानमंत्री पद को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.नेतान्याहू की लिकुद पार्टी ताज़ा चुनाव में बहुमत से बहुत दूर रह गई और अब ऐसा लग रहा है कि उनके विरोधी बैनी गैन्त्ज़ की ब्लू एंड वाइट पार्टी की सरकार इज़राइल में आ जाएगी. ब्लू एंड वाइट पार्टी के पास भी बहुमत का पूरा आँकड़ा नहीं है, अब लिकुद पार्टी ब्लू एंड वाइट को समर्थन देने को तो राज़ी है लेकिन चाहती है कि नेतान्याहू पर भ्रष्टाचार के मामले न चलाये जाएँ.

लिकुद देश में दक्षिणपंथी पार्टी है जबकि ब्लू एंड वाइट के विचार सेंटरिस्ट हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दोनों दलों में चल रही इस सिलसिले में बातचीत इसीलिए रुकी हुई है क्यूँकि नेतान्याहू को इम्युनिटी दी जाए, ऐसी माँग लिकुद कर रही है. ब्लू एंड वाइट पार्टी को जॉइंट लिस्ट का समर्थन भी मिल सकता है. जॉइंट लिस्ट में अरब दल भी हैं जिसकी कुल 13 सीटें क्नेस्सेट में हैं जबकि ब्लू एंड वाइट की 32 सीटें हैं.

बहुमत के लिए 120 सीटों के सदन में 61 सीटें चाहिएँ. लिकुद के पास 33 सीटें हैं और अगर वो ब्लू एंड वाइट से मिल जाए तो बैनी गंत्ज़ प्रधानमंत्री होंगे लेकिन लिकुद मांग कर रही है कि नेतान्याहू पर भ्रष्टाचार का मुक़दमा न चले. मीडिया में अब ये बात खुल कर आने लगी है. अरब जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि नेतान्याहू ने पड़ोसी फ़िलिस्तीन पर कार्यवाई की. फ़िलिस्तीन पर लगातार ब’मबारी करके प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने छद्म राष्ट्रवाद की भावना इज़राइल के नागरिकों में डालने की कोशिश.

ये एक ऐसी भावना है जिसका विरोधी भी विरोध करने से घबराता है. मीडिया में अचानक बहस का मुद्दा नेतान्याहू का भ्रष्टाचार नहीं बल्कि राष्ट्रवाद हो गया. इज़राइल के नेताओं पर इस तरह के आरोप लगे हैं कि उन्होंने फ़िलिस्तीन और इज़राइल के लोगों में कभी दोस्ती होने ही नहीं दी. अक्सर ऐसा हुआ है कि जब भी इज़राइल में कोई परेशानी होती है तो तुरंत ही फ़िलिस्तीन के लोगों के प्रति नफ़रत भरे बयान दिए जाते हैं या फिर ह’मला ही कर दिया जाता है. ये जनता का ध्यान भटकाने के लिए होता है लेकिन इसमें मानव-क्ष’ति होती है.

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