इस्तांबुल: संयुक्त राज्य अमरीका और तुर्की में रिश्ते कभी नर्म और कभी गर्म वाली स्थिति में चल रहे हैं. तुर्की और संयुक्त राज्य अमरीका के रिश्तों में पिछले दिनों एक बार फिर गिरावट देखने को मिली है. अमरीका की सीनेट में 1915 में हुई ह’त्याओं को अर्मेनियाई समाज के नरसं’हार की संज्ञा दी है. इस बात से तुर्की बहुत नाराज़ है. तुर्की ने इस पर तीख़ी प्रतिक्रिया है.

आपको बता दें कि तुर्की मानता है कि पश्चिमी देश और अमरीका लगातार इस कोशिश में है कि वो 1915 की ट्रेजेडी को “अर्मेनियाई नरसंहार” बताये जिससे कि तुर्की दुनिया में बदनाम हो जाए. अमरीकी सीनेट में पारित हुए इस प्रस्ताव पर तुर्की के डिप्टी विदेश मंत्री सेदात ओनाल ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने प्रतिक्रया देते हुए कहा कि इस वोट से तुर्की और अमरीका के रिश्तों में खटास आएगी. असल में अर्मेनिया दावा करता है कि उस दौरान 15 लाख से अधिक लोग मारे गए थे.

तुर्की का कहना है कि इतने अधिक लोग नहीं मारे गए थे और साथ ही तुर्क भी इसमें बड़ी संख्या में मारे गए थे. ओटोमन साम्राज्य के अंतिम वक़्त में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस तरह का न’रसंहार हुआ था, ऐसा पश्चिमी देश मानते हैं. अमरीका के इस क़दम के बाद वो उस लिस्ट में पहुँच गया है जिसमें 30 और देश हैं.हालाँकि अमरीकी एम्बसी ने अंकारा में कहा कि सीनेट के वोट के बाद भी अमरीका की पोजीशन बदलती नहीं है. ट्रम्प तुर्की से रिश्ते मज़बूत करने की कोशिश में हैं और तुर्की को नाराज़ नहीं करना चाहते.

ट्रम्प ने पिछले महीने कहा था कि वो तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के बड़े प्रशंसक हैं. इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प सीनेट के इस वोट के बाद भी इसे अर्मेनिया नरसं’हार की संज्ञा नहीं देंगे.

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