आदित्य ठाकरे को CM बनाने की माँग के बीच दो विधायकों ने भाजपा को दिया समर्थन..

October 27, 2019 by No Comments

मुंबई: देश में इस समय दिवाली का पावन पर्व मनाया जा रहा है लेकिन महाराष्ट्र में किसके सर पर ताज होगा और कौन राजनीतिक दिवाली में ज़्यादा पटाखे फोड़ेगा ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा. महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा दोनों गठबंधन में होने के बाद भी दोनों के बीच किसी क़िस्म का कोल्ड वार चल रहा है. शिवसेना सुबह तक इस बात से ख़ुश थी कि उसको दो और विधायकों का समर्थन मिल गया है.

इसको लेकर शिवसेना के नेता कहने भी लगे थे कि अब तो शिवसेना का ही हक़ मुख्यमंत्री की पोस्ट पर ज़्यादा होता है. परन्तु भाजपा ने भी अपने दाँव पेंच शुरू किए और ख़बर आयी कि भाजपा की बाग़ी नेत्री जो इस बार मीरा भायंदर से निर्दलीय चुन कर आयी हैं, उन्होंने भाजपा को समर्थन दे दिया. उनके समर्थन से भाजपा एक बार फिर शिव सेना को ये बताना चाह रही है कि उसकी पार्टी बड़ी है.

ग़ौरतलब है कि प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो विधायकों ने शिवसेना को समर्थन दिया है. इस बीच अब एक और ऐसी ख़बर आ रही है जो भाजपा को इस खींचतान में मज़बूत करेगी. बरषी से निर्दलीय चुन कर आये विधायक राजेन्द्र राउत ने भी आज भाजपा को समर्थन देकर शिवसेना के लिए कैलकुलेशन ज़रा मुश्किल कर दी है. आपको बता दें कि शिवसेना मांग कर रही है कि इस बार आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए जबकि भाजपा इस बात के लिए तैयार नहीं है.

भाजपा नेता देवेन्द्र फडनवीस ने इशारों में कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाला भाजपा-शिवसेना गठबंधन मज़बूत सरकार देगा.उन्होंने यह बात पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए की. उन्होंने कहा कि सरकार बनाने की प्रक्रिया दिवाली के बाद शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि जनता ने जो जनादेश दिया है वो भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पक्ष में है.इस बीच भाजपा-शिवसेना के गठबंधन की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के नेता और मोदी सरकार में मंत्री रामदास अठावले ने बयान दिया है.

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भाजपा रोटेशनल मुख्यमंत्री पर राज़ी होगी लेकिन उप-मुख्यमंत्री की पुसर शिवसेना को पाँच साल के लिए दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि शिवसेना को उप-मुख्यमंत्री की पोस्ट आदित्य ठाकरे के लिए एक्सेप्ट कर लेनी चाहिए और देवेन्द्र फडनवीस को मुख्यमंत्री बनना चाहिए. आपको बता दें कि भाजपा को 288 सीटों वाली विधानसभा में 105 सीटें मिली हैं जबकि शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं. इसका अर्थ है कि अगर शिव सेना गठबंधन को तोड़ दे तो सरकार नहीं बन पाएगी. वहीँ इस बीच ऐसी ख़बर आ रही है कि शिव सेना अन्दर अन्दर एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं से भी बात कर रही है. इस चुनाव में कांग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिली हैं जबकि 2 सपा और एक सीपीएम को मिली है.

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