क्या अमेरिका और ईरान दोनों ही चाहते हैं समझौता, ट्विटर पर हुआ…

ईरान ने अपने टॉप कमांड’र जनरल क़ा’सिम सुलेमा’नी की ह’त्या का ब’दला लेने के लिए इराक़ स्थित अमेरिका के मिलेट्री बेसे’स पर बड़ा हम’ला किया है। बैलिस्टिक मिसा’इल्स से किया गया ये हम’ला ईरान के क़ा’सिम सुले’मानी की ह’त्या का जवाब है। ईरान ने अपने पवित्र स्थल पर लाल झंडा फह;राकर बदले का ऐ’लान कर ही दिया था। पर अब जिस तरह के ब’यान अमेरिकी राष्ट्रपति डानल्ड ट्रम्प और ईरान के विदेश मंत्री के आए हैं उससे लगता है कि दोनों ही इस यु’द्ध में सुलह के लिए भी तैयार हैं।

जहाँ ईरान के विदेश मंत्री ने इस कार्रवाही को एक तुलनात्मक कार्रवाही कहा जिसका अर्थ है उन्होंने अमेरिका के किए गए काम का बदला लिया है। वहीं हाल ही में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डानल्ड ट्रम्प ने बयान दिया तो कहा कि “सब ठीक है और हम ईरान के साथ शां’ति को तैयार है” इसका सीधा अर्थ यही लिया जा रहा है कि ईरान और अमेरिका दोनों ही अब यु’द्ध से ज़्यादा शां’ति चाहते हैं लेकिन सिर्फ़ उसी स्थिति में जब दूसरा पक्ष भी पूरी तरह से सहमति दर्शाए।

एक ओर जहाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डानल्ड ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि “जब तक मैं राष्ट्रपति हूँ ईरान को न्यू’किलर हथि’यार हासिल नहीं करने दूँगा। ईरान अब कमज़ोर नज़र आ रहा है। ईरान की ओर से जो भी हम’ला हुआ उसमें किसी की भी अमेरिकी की मौ’त नहीं हुई है” ट्रम्प ने अपने बयान में किसी तरह की जवाबी हम’ले की कोई बात नहीं की तथा शांति के लिए अपनी सहम’ति भी दर्शायी।

ईरान के विदेश मंत्री जा’वेद ज़ा’रिफ ने भी एक ट्वीट करके कहा कि ” ईरान ने US के आर्टिकल 51 के अनुसार संरक्षणात्मक कार्रवाही करते हुए तुलनात्मक कार्रवाही की है और उस बे’स पर हम’ला किया जहाँ मौजूद ड’रपोक सेना ने हमारे नागरिकों और वरिष्ठ अधिकारियों पर हम’ला किया था। ईरान किसी तरह का यु’द्ध नहीं करना चाहता लेकिन अगर किसी तरह का हम’ला किया जाता है तो उसका जवाब देने के लिए तैयार है”

दोनों ही पक्षों के बयान बताते हैं कि वो यु’द्ध नहीं चाहते लेकिन ख़ुद को कम’ज़ोर भी साबित नहीं कर रहे हैं अगर ऐसे में कोई भी यु’द्ध की पहल करता है दोनों ही इसके जवाब के लिए तैयार हैं लेकिन राहत की बात यही है कि दोनों ही पक्ष अपनी ओर से इस तरह का कोई क़दम उठाना नहीं चाहते। ऐसे में अमेरिका को भी शां’ति क़ायम रखने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि उनकी ओर से उठाए क़दम से ही ऐसी स्थिति पैदा हुई।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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