अखिलेश यादव ने किया साफ़-सरकार बनने पर शिवपाल यादव होंगे कैबिनेट मंत्री..

November 14, 2020 by No Comments

इटावा: कई जानकार मानते हैं कि 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार का एक कारण शिवपाल यादव का नाराज़ हो जाना था. शिवपाल और अखिलेश के बीच चली खुली सियासी जंग ने सपा को चुनाव में नुक़सान पहुँचाया. वहीं ये भी सच है कि शिवपाल यादव को ख़ुद इससे विशेष कोई फ़ायदा नहीं हुआ. शिवपाल और अखिलेश दोनों को इस बात का अंदाज़ा हो चुका है कि जब लड़ाई बड़ी हो तो छोटी मोटी लड़ाइयां भुलानी होती हैं.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज कुछ इसी तरह का इशारा किया है. उनके इशारे से साफ़ है कि वो प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव के प्रति नर्म रुख़ अपनाए हुए हैं. उन्होंने इटावा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कहा कि 2022 विधानसभा चुनाव को लेकर छोटे दलों से एडजस्टमेंट होगा लेकिन बड़े दलों से कोई गठबंधन नहीं होगा. अखिलेश ने साफ़ कर दिया है कि वो बसपा से कोई गठबंधन आने वाले समय में नहीं करेंगे.

अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव की पार्टी से जुड़े सवाल पर कहा,”उस पार्टी को भी एडजेस्ट करेंगे. जसवंतनगर उनकी (शिवपाल) सीट है. समाजवादी पार्टी ने वह सीट उनके लिए छोड़ दी है और आने वाले समय में उनके लोग मिलें, सरकार बनाएं, हम उनके नेता को कैबिनेट मंत्री भी बना देंगे… और क्या एडजस्टमेंट चाहिए?”

गौरतलब है कि पूर्व में शिवपाल यादव भी समाजवादी पार्टी से गठबंधन की इच्छा जता चुके हैं. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश और शिवपाल के बीच तल्खी बहुत बढ़ गई थी. शिवपाल ने बाद में सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया था. अखिलेश ने भाजपा पर बिहार विधानसभा के हालिया चुनाव में महागठबंधन को बेईमानी से हराने का आरोप लगाते हुए कहा कि सबसे ज्यादा जनसमर्थन महागठबंधन की रैलियों में था. जितने भी सर्वे हुए उन सभी में गठबंधन को ऐतिहासिक जीत की तरफ बताया गया था लेकिन जब मशीन खुली, परिणाम आया, नतीजे रोके गए और जीत के प्रमाण पत्र किसी और को दे दिए गए.

उत्तर प्रदेश की सात विधानसभा सीटों के पिछले दिनों हुए उपचुनाव में सपा का प्रदर्शन आशा के अनुरूप न रहने के सवाल पर अखिलेश ने कहा “जब चुनाव जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी, थानाध्यक्ष और सिपाही लड़ेंगे तो और कौन जीतेगा? उपचुनाव में भाजपा चुनाव नहीं लड़ रही थी बल्कि उसकी सरकार के अधिकारी लड़ रहे थे.”

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