हिन्दू और मुस्लिम सभी का चहेता मुग़ल बादशाह अकबर…

August 7, 2018 by No Comments

जलालउद्दीन मुहम्मद अकबर: 14 अक्टूबर 1542 को जन्मे अकबर ने अपने पिता हुमायूँ की मौत के बाद गद्दी संभाली. 1556 से 1605 तक अकबर का शासन रहा. अकबर ने दीन ए इलाही धर्म की स्थापना भी की थी, ये धर्म कामयाब ना हो सका. इन्होने जज़िया कर को ख़त्म किया.

बाबर और हुमायूँ द्वारा स्थापित किया गया मुग़ल साम्राज्य अभी भी उतनी मज़बूती से खड़ा नहीं हो पाया था. आम जन मानस में अभी भी ये धारणा थी कि मुग़ल विदेशी हैं लेकिन अकबर ने इन सभी धारणाओं को धराशायी कर दिया. 14 अक्टूबर, 1542 को जन्मे अकबर ने अपने पिता हुमायूँ के मरने के बाद सं 1556 में गद्दी संभाली. 11 फ़रवरी, 1556 को महज़ 13 वर्ष की उम्र में अकबर ने मुग़ल सल्तनत का भार अपने कन्धों पर लिया. शेर शाह सूरी से हारने के बाद हुमायूँ को देश से जाना पड़ा, अकबर का बचपन आम मुग़ल प्रिंस की तरह ना था लेकिन इन मुश्किलों का ही असर था कि अकबर एक जूझारू और शानदार बादशाह बन कर उभरे.

अकबर ने मुग़ल साम्राज्य की शान में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा किया और मुग़ल सीमा का भी ख़ूब विस्तार किया.अकबर को उनकी नीतियों की वजह से अकबर महान भी कहा जाता है. सन 1605 में उनकी मौत हो गयी. उनके बाद उनके बेटे जहाँगीर ने मुग़ल शासन को संभाला.

विकिपीडिया पर अकबर के बारे में लिखा है-

उसने हिन्दू-मुस्लिम संप्रदायों के बीच की दूरियां कम करने के लिए दीन-ए-इलाही नामक धर्म की स्थापना की। उसका दरबार सबके लिए हर समय खुला रहता था। उसके दरबार में मुस्लिम सरदारों की अपेक्षा हिन्दू सरदार अधिक थे। अकबर ने हिन्दुओं पर लगने वाला जज़िया ही नहीं समाप्त किया, बल्कि ऐसे अनेक कार्य किए जिनके कारण हिन्दू और मुस्लिम दोनों उसके प्रशंसक बने। अकबर मात्र तेरह वर्ष की आयु में अपने पिता नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायुं की मृत्यु उपरांत दिल्ली की राजगद्दी पर बैठा था। अपने शासन काल में उसने शक्तिशाली पश्तून वंशज शेरशाह सूरी के आक्रमण बिल्कुल बंद करवा दिये थे, साथ ही पानीपत के द्वितीय युद्ध में नवघोषित हिन्दू राजा हेमू को पराजित किया था. अपने साम्राज्य के गठन करने और उत्तरी और मध्य भारत के सभी क्षेत्रों को एकछत्र अधिकार में लाने में अकबर को दो दशक लग गये थे। उसका प्रभाव लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर था और इस क्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर सम्राट के रूप में उसने शासन किया। सम्राट के रूप में अकबर ने शक्तिशाली और बहुल हिन्दू राजपूत राजाओं से राजनयिक संबंध बनाये और उनके यहाँ विवाह भी किये।

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