काबुल: अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद वैश्विक स्तर पर कोशिश हो रही है कि अफ़ग़ानिस्तान की आने वाली सरकार सब को साथ लेकर चलने वाली हो और पुराने तालिबान की तुलना में बेहतर हो. तालिबान प्रवक्ता भी अब तक जो बयान दे रहे हैं वो संतोषजनक हैं. विशेष चिंता महिलाओं के अधिकारों के लिए है, हालाँकि तालिबान ने पिछले दो-तीन दिन में कई बार ये कहा है कि वह महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करेगा.

अफ़ग़ानिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बाहर तालिबान सरकार की मान्यता बढ़े, इसलिए तालिबानी नेता अपने स्तर पर कोशिश कर रहे हैं. ख़बर है कि पूर्व राष्ट्रपति हामिल करज़ई से भी तालिबानी नेता अनस हक्कानी ने मुलाक़ात की है. इसके अलावा देश के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला से भी तालिबानी नेता ने मुलाक़ात की है. तालिबान के रुख़ में इस बार ख़ासी नरमी देखी जा रही है.

तालिबान की ओर से अब तक जो कहा गया है उसके मुताबिक़ महिलाओं को पूरा शरीर ढँकने वाला बुर्क़ा पहनना ज़रूरी नहीं होगा, हिजाब पहनना ज़रूरी होगा. लड़कियों को पढ़ाई, और रोज़गार हासिल करने का पूरा अधिकार होगा. तालिबान के बड़े नेता मुल्ला अब्दुल्ला गनी बरादर भी कतर की राजधानी दोहा से काबुल पहुंच चुके हैं.

उन्हें तालिबान के लड़ाकों की ओर से जबरदस्त स्वागत मिला है. तालिबान नेता अगले कुछ दिनों में अंतरिम सरकार का ऐलान कर सकते हैं. मुल्ला बरादर को अफगानिस्तान का अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है. अफगानिस्तान में पख्तून के अलावा ताजिक, उज्बेक, शिया, हजारा समेत तमाम गुट हैं, ऐसे में तालिबान ने किसी के प्रति शत्रुता का भाव नहीं दिखाया है.

तालिबान ने अफगानिस्तान की पिछली सरकार के लिए काम करने वाले लोगों को आम माफी भी दे दी है और उनसे सरकारी कामकाज पर लौटने को कहा है. तालिबान ने अपने लड़ाकों से किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं करने को कहा है. तालिबान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वो अपने देश की धरती को किसी भी अन्य मुल्क के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देंगे. उसने भारत के विकास कार्यों को जारी रखने का भी संकेत दिया है.

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