अफ़ग़ानिस्तान में इस समय चौथे राष्ट्रपति चुनाव चल रहे हैं. लम्बे समय तक टलने के बाद अब अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव हो रहे हैं. चुनाव को लेकर हुए प्रचार में अबर्दस्त हिंसा देखने को मिली. इस चुनाव की एहमियत इसलिए भी अहम् हो जाती है क्यूंकि अमरीका और तालिबान के बीच चल रही बातचीत कोलैप्स हो गई. इस चुनाव में मुख्य मुक़ाबला मौजूदा राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और उनके विरोधी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह के बीच है.

पिछले चुनाव में दोनों के बीच काँटे का मुक़ाबला हुआ था जिसके बाद अजीब सी स्थिति बन गई थी. इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अमरीका के तत्कालीन सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेटे जॉन केरी ने दोनों के बीच एक कोम्प्रोमाईज़ कराया था. इस डील के मुताबिक़ ग़नी राष्ट्रपति रहेंगे और उन्हीं के बराबर की पोस्ट चीफ़ एग्जीक्यूटिव अब्दुल्लाह रहेंगे. ये अग्रीमेंट पाँच साल तक चला और इसकी वजह से किसी भी तरह का राजनीतिक विवाद टल गया.

परन्तु इस बार ऐसी स्थिति नहीं है. अफ़ग़ानी पत्रकार बिलाल सरवरी कहते हैं की दोनों में से कोई भी उम्मीदवार सत्ता में साझेदारी को तैयार नहीं है. इस बार के चुनाव में ग़नी और अब्दुल्लाह दोनों ने एक दूसरे पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाये हैं . इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नज़र लगी हुई है. आपको बता दें कि भारत के लिए भी ये काफ़ी अहम् है. चुनाव के बारे में एक और गंभीर बात जो है वो ये है कि इन दोनों उम्मीदवारों के इलावा तीसरे उम्मीदवार हैं गुलबुद्दीन हेक्मत्यर, उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि उन्हें नतीजे पसंद नहीं आये तो वो हथियार उठा लेंगे.

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