ABVP के ख़िलाफ़ एकजुट हुए AISA और NSUI, JNU हिंसा मामले पर निकाला मार्च..

लखनऊ: आज 11 अप्रैल को लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी द्वारा जेएनयू परिसर में छात्रों पर की गई हिंसा के ख़िलाफ़ प्रतिरोध मार्च निकाला। जेएनयू के छात्रों के अनुसार, एबीवीपी ने पहले मांसाहारी भोजन के नाम पर कावेरी छात्रावास के मेस सचिव के साथ मारपीट की और बाद में एबीवीपी के खाद्य संहिता लागू करने के इस विभाजनकारी एजेंडे का विरोध कर रहे छात्रों के साथ भी मारपीट की। एबीवीपी द्वारा की गई इस भयानक हिंसा में महिला छात्रों के साथ यौन शोषण व कई अन्य छात्रों को गंभीर चोट की ख़बर सामने आई।

आइसा द्वारा छात्र समुदाय पर निरंतर बढ़ती एबीवीपी की हिंसा के ख़िलाफ़ देशव्यापी प्रतिरोध दिवस का आह्वान किया गया। आइसा के इस देशव्यापी आह्वान में लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने आइसा और एनएसयूआई के नेतृत्व में गेट नंबर 5 से 1 तक प्रतिरोध मार्च कर गेट नम्बर 1 पर ही सभा को संबोधित किया और आरएसएस-भाजपा के सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी एजेंडे पर एबीवीपी द्वारा देशभर के विभिन्न परिसरों में छात्रों पर लगातार बढ़ती हिंसा की निंदा की।

आइसा-लखनऊ की अध्यक्ष कॉमरेड प्राची ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा सरकार के राज में देश के हर राज्य उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान व मध्यप्रदेश आदि में विभिन्न उग्र हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा मुस्लिम समुदाय पर हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। इसी तरह कल भी कई जगहों से इन्हीं हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा मस्जिदों व मुस्लिम रेहड़ी-पटरी वालों पर हमले की खबरें आईं, जिससे जनता में गहरे असुरक्षा का भाव पैदा होने लगा है। कल जेएनयू में भी संघी गुंडों ने होस्टल मेस में नॉनवेज पर बैन के नाम पर छात्रों के साथ मारपीट की। लेकिन जेएनयू के छात्रों द्वारा दिखाया गया प्रतिरोध न केवल लोगों पर खाद्य संहिता लागू करने के ख़िलाफ़ है, बल्कि हमारे देश में सांप्रदायिक घृणा व फासीवादी हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच सांस्कृतिक विविधता को बचाने के लिए है।”

एनएसयूआई एलयू इकाई के संयोजक विशाल ने कहा कि “कैसे विभिन्न राज्यों ने मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया, जो सीधे तौर पर कई परिवारों के भरण-पोषण से संबंधित है। विशाल ने आगे कहा कि संविधान के अनुसार लोगों को यह तय करने का अधिकार है कि वे क्या खाना चाहते हैं और क्या नहीं।”

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने कहा कि जेएनयू में इस भयानक हिंसा के ख़िलाफ़ पीएम मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी अपराधियों के साथ सीधा समर्थन को दिखाती है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस घटना पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और छात्रों की सुरक्षा के लिए तुरंत हस्तक्षेप कर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। साथ ही छात्रों ने देश में बढ़ते फासीवादी हमले व नफरत की राजनीति के ख़िलाफ़ एक बड़ी और मजबूत एकता को ही एकमात्र रास्ता बताया।

(प्रेस विज्ञप्ति)

About Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

View all posts by Arghwan Rabbhi →

Leave a Reply

Your email address will not be published.