लोकसभा चुनाव के बाद इन राज्यों में हारी भाजपा, यहाँ तो जीत कर भी नहीं बनी सरकार..

नई दिल्ली: 2014 में हुए लोकसभा चु’नाव में बीजेपी ने देश के अंदर अपनी सरकार बनाई। और कांग्रेस को देश की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। नरेंद मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बिजेपी ने शानदार प्र’दर्शन करते हुए अपनी जीत दर्ज की। और एक बार फिर देश मे बीजेपी की सरकार बनी। दुबारा नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के पद पर काबिज़ हुए। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए उनमे से कौनसे राज्य बिजेपी हा’र गई उनके बारे में समझते हैं। झारखंड में एनडीए गठबंधन को 2019 लोकसभा चुनाव में 12 सीटों पर जीत मिली थी।

यहां 81 विधानसभा की सीटें हैं। जिसमे ब’हुमत का आंकड़ा 41 सीट का है। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन रहा। झारखंड मुक्ति मोर्चा को 30 सीटें मिली, कांग्रेस को 16 सीटे मिली, आरजेडी को 1 तो वहीं, बिजेपी को 25 सीटें ही मिली। अगर झारखंड के 2019 विधानसभा चुनाव की तु’लना साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव से करें तो मालूम होता है कि बीजेपी के प्रदर्शन में पहले के मु’काबले 2019 में कमी हो गई। क्योंकि 2014 में बीजेपी 37 सीटें लेकर आई थी और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, एनडीए गठबंधन 42 सीटों पर जीता था। रघुबर दास मुख्यमंत्री बनाये गए थे।

लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें कम होकर 25 पर आ गई। बीजेपी झारखंड चुनाव हार गई। इसका कारण ये भी है कि बीजेपी के नेता और 2014 में बने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास पर जनता आ’रोप लगा रही थी। उनपर आरोप लगने लगे थे कि वो जनता की स’मस्याओं को सुनन्ने के लिए उनके बीच नही पहुंचते। दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमन्त सोरेन की बढ़ती हुई लोकप्रियता ने भी बीजेपी को नु’कसान पहुंचाया। इसी वजह से बीजेपी ने झारखंड राज्य को गवां दिया जहां उसकी पहले सरकार थी। अब अगला राज्य महाराष्ट्र है जहां पहले एनडीए गठबंधन की सरकार थी लेकिन बीजेपी ने 2019 में उसे भी खो दिया।

2014 में महाराष्ट्र में प्रमुख दावेदार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी की एनडीए थे। यूपीए गठबंधन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल थी जबकि एनडीए गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना शामिल थी। 2014 में बीजेपी 122 सीटों पर सि’मट गई थी। और शिवसेना ने चुनाव में 63 सीटें जीतीं थीं। जिसके बाद शिवसेना दूसरे नंबर पर पहुंच गई थी। पिछले 15 साल से राज्य में सत्ता चलाने वाली कांग्रेस को 42 सीटें और एनसीपी को 41 सीटें मिली थी। 2014 में बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने।
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लेकिन, 2019 लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से 41 पर जीत मिली थी। बीजेपी ने 23 और उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने 18 सीटों पर जीत हासिल की थी। फरवरी 2019 में, भाजपा और शिवसेना ने फिर से भाजपा के लिए 25 और शिवसेना के लिए 23 सीटों के साथ गठबंधन की घो’षणा की। चुनावी नतीजे आने के बाद बीजेपी को -105, कांग्रेस को – 44, और शिवसेना को- 56 सीटें मिली। महाराष्ट्र में 2014 के चुनाव में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन ने सरकार बनाई थी और कांग्रेस , एनसीपी को वि’पक्ष में रहने पड़ा था। लेकिन 2019 में यह तस्वीर बदल गई। बीजेपी ने एनसीपी के बड़े नेता अजीत पवार को अपनी तरफ कर लिया और रातों रात बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

हालाँकि बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति में देवेंद्र फडणवीस ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही इ’स्तीफा दे दिया था। इस बार भी भाजपा और शिवसेना ने साथ में चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना और भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर अ’नबन गई और गठबंधन टू’ट गया। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी गठबंधन के तहत सरकार बनाई। सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करने के बाद भी बीजेपी राज्य में सरकार नही बना पाई क्योंकि बीजेपी ग’ठबंधन में सफल नही हो पाई थी।

2016 में तमिलनाडु के अंदर अन्नाद्रमुक की प्रमुख जयललिता की सरकार थी। अन्नाद्रमुक को 136 सीटों पर जीत मिली थी। दूसरी तरफ द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को 98 सीटें हासिल हुई थी। कांग्रेस को 8 सीटें ही मिली थी। जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए । 2021 चुनाव में, एआईडीएमके के साथ बीजेपी ने गठबंधन किया। बीजेपी ने दक्षिण भारत में अपने विस्तार के लिए एआईडीएमके को अपना पूरा समर्थन दिया। वहीं कांग्रेस ने चुनावों में डीएमके से गठबंधन किया।

द्रमुक ने 133 सीटे जीती। एनडीए गठबंधन ने 75 सीटे जीती। जिसमें से अन्नाद्रमुक ने 66 पर जीत हासिल की थी। यहां 234 विधानसभा सीटो के लिए वोटिंग हुई जिसमे बहुमत का आंकड़ा 108 सीटों का है। और द्रमुक ने अन्नाद्रमुक को हरा दिया। अन्नाद्रमुक के हा’रने का ये कारण भी है कि अब उनके पास जयललिता जैसा नेता नही है। दूसरी तरफ काफी समय में सत्ता में रहने की वजह से उसकी लोकप्रियता जनता के बीच कम हो गई। बीजेपी का तमिलनाडु में विस्तार करने का सपना टू’ट गया।करुणानिधि की मौ’त के बाद द्रमुक ने पहली बार चुनाव लड़ा। द्रमुक के नेता एमके स्टालिन ने चुनाव में बहुत मेहनत की थी। उनकी मेहनत रंग लाई और वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। इस प्रकार बीजेपी ने झारखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु राज्य को गवां दिया। बिजेपी इन राज्यों में सरकार नही बना पाई।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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