पटना: बिहार में इन दिनों बाढ़ और सियासत दोनों उफ़ान पर हैं। कम सीटें भी पाकर बिहार के मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार इन दिनों अपने राजनैतिक जीवन के सबसे कठिन पड़ाव पर हैं। कम सीटें आने से नीतीश मुख्यमंत्री तो बन गए हैं लेकिन उनकी ताकत पहले जैसी नही रही है।बीजेपी और सहयोगी दल लगातर नीतीश कुमार पर दबाव बनाए हुए हैं। इस द’बाव का बोझ सरकार के फैसलों में भी अब दिखाई देता है। राजनैतिक जोड़ तोड़ की बुनियाद पर बनी नीतीश कुमार सरकार की हर ईंट अलग अलग आकर प्रकार की है।पहले से ही कमज़ोर बुनियाद पर बनी बिहार सरकार की दीवार को आये दिन कोई न कोई सहयोगी दल हिलाने का प्रयास करता ही रहता है। वहीं मुख्य विपक्षी दल के नेता तेजस्वी भी रोज़ाना किसी न किसी सवाल पर नीतीश कुमार की सरकार को ध’क्का मारते रहते हैं। जिसका असर ये हुआ है कि बिहार सरकार के सभी कल पुर्जे ढीले हो गए हैं।

एक कहावत भी है कि जब मु’सीबत आती है तो चारों तरफ़ से आती है और यही कहावत अब नीतीश कुमार के ऊपर चरितार्थ हो रही है। सहयोगी दलों का दबाव झेल रहे नीतीश कुमार के गले अब एक नई मु’सीबत पड़ने वाली है। माज़रा कुछ यूं है कि आरजेडी के 25 वें स्थापना दिवस पर लालू प्रसाद यादव बिहार आने वाले हैं। बिहार सियासत के बेताज बादशाह लालू प्रसाद यादव के बिहार आवागमन से नीतीश कुमार ही नही बल्कि बीजेपी के दिलों की धड़कनें बढ़ गयी हैं। बिहार की राजनीति की धुरी लालू प्रसाद यादव ही हैं और उनके बिहार आने से बिहार सरकार का गोल गोल घूमना तय है। ढाई साल के बाद जेल से जमानत पर छूटने के बाद लालू प्रसाद इन दिनों दिल्ली में बेटी सीमा यादव के घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। लेकिन आरजेडी स्थापना दिवस पर बिहार आने की पूरी संभावना है इतना ही नही अंदाजा ये भी लगाया जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव उस दिन जनता को संबोधित भी कर सकते हैं। लालू का इस तरह से बिहार की राजनीति में एक्टिव हो जाना जेडीयू और बीजेपी को रास नही आ रहा है। बीजेपी और नीतीश दोनों जानते हैं कि सरकार के सहयोगी दल ‘हम’ और ‘वीआईपी’ दोनों सरकार की क’मज़ोर कड़ी हैं। लालू इन दोनों को तोड़ सकते हैं। लालू ने अभी हाल में ही जीतनराम मांझी व मुकेश सहनी से फोन पर वार्तालाप भी किया था। तभी से ये आंकलन लगाया जा रहा है बिहार में जल्दी ही कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है। इस बात की पुष्टि तेजस्वी यादव ये कहकर कि ‘बिहार सरकार 2-3 महीने में गिर जाएगी’ लगातर कर रहे हैं। सरकार पर आने वाले ख’तरे को जेडीयू ,बीजेपी दोनों ने महसूस कर लिया है। इसी का असर है कि जेडीयू बीजेपी दोनों ही लालू प्रसाद यादव पर आ’क्रामक हो गयी है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तो यह तक कह दिया है कि लालू प्रसाद यादव को जमानत बीमार होने की वजह से मिली है अगर लालू राजनीति करते हैं तो सीबीआई को संज्ञान लेना चाहिये। इसी तरह जेडीयू के नेता भी रोज़ाना आरजेडी,लालू प्रसाद यादव के ऊपर जवाबी ह’मला कर रहे हैं। बीजेपी और जेडीयू में मची इसी ह’लचल से अंदाज़ा लगाया जा रहा कि एनडीए में इस समय आने वाले सियासी तू’फान से बचने की कोशिश में लगी हुई है।

सीटों के गणित को देखा जाए तो 243 विधानसभा सीटों में से बहुमत के लिए 122 सीटों की ज़रूरत किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए चाहिए। इस समय 127 सीटों का समर्थन एनडीए के पास है। वहीं महागठबंधन के पास 110 सीटों का समर्थन है। महागठबंधन 12 सीटों के अंतर से सरकार बनाने में ना’काम रही थी। इस गणित को इस तरह समझा जा सकता है – आरजेडी(75)+वाम दल(16)+कांग्रेस(19)=110 अगर इस मे जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी की 4,4 सीट मिला दी जाएं तो संख्या 118 पर पहुंच जाती है। अगर संख्या यहां तक पहुंच जाती है तो ओवैसी की पार्टी के 5 विधायक महागठबंधन को समर्थन दे सकते हैं। तब संख्या 123 पहुंच जायेगी जो बहुमत से 1 ज्यादा है। बस इसी गणित से नीतीश कुमार समेत पूर एनडीए ड’रा हुआ है वो जानतें हैं लालू प्रसाद यादव सि’यासत के ऐसे जा’दूगर हैं जो कोई भी जा’दू कर सकते हैं। लालू के जादू से बचने के लिए ही पूरे राजग को टो’टकों का सहारा लेना पड़ रहा है।

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